खराहल (कुल्लू)। जिले में लंबे से समय से बारिश और बर्फबारी नहीं होने से रबी की फसल प्रभावित होने लगी है। बताया जा रहा है कि जिले में सूखे की चपेट में आने से 35 फीसदी बर्बाद हो गई है। समय रहते बारिश व बर्फबारी नहीं हुई तो फसल का नुकसान और बढ़ सकता है। अपर्याप्त नमी के कारण गेहूं, जौ, मटर और लहसुन के पौधे मुरझाने लगे हैं। किसानों का कहना है कि समय पर बारिश व बर्फबारी न होने के कारण तमाम फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है। बीजाई हुई फसलें बिना पानी के सूखने के कगार पर हैं। ऐसे में फसलों का उत्पादन भी गिरावट होने की आशंका जाहिर की जा रही है।
जिले में कृषि के योग्य भूमि 65186 हेक्टेयर है। जिसमें 14000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, जौ 1000 लहसुन 1200 हेक्टेयर, प्याज 500 बीघा और मटर 1200 हेक्टेयर और साग-सब्जियां सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर पैदा हो रही है लेकिन सिंचाई की व्यवस्था बहुत कम होने के चलते अधिकतर खेती बारिश पर निर्भर है। जिले में करीब 3000 हेक्टेयर भूमि सिंचाई के अधीन है। अधिकतर सिंचाई योजनाएं खस्ताहाल हैं। ऐसे में किसान बारिश पर ही निर्भर है।
घाटी के किसान अमित कुमार, चमन, रामनाथ, कमल, सतीश ठाकुर, महेश शर्मा, चुनी लाल, अशोक ठाकुर, मोहर सिंह, नवीन, बुद्धि प्रकाश शर्मा, ज्ञान ठाकुर, चने राम, गौतम ठाकुर तथा लाल चंद आदि का कहना है कि इस बार जनवरी माह में बारिश अब तक नहीं हुई है। जिसके कारण रबी फसल पर संकट गहराया है और तमाम फसलें सूखने लगी हैं। 35 फीसदी फसलों को सूखे से नुकसान हुआ है। इस संबंध में कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक रतन भारद्वाज के अनुसार लंबे समय से बारिश और बर्फबारी नहीं होने से रबी की फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। जल्द बारिश नहीं हुई तो इसका असर उत्पादन पर निश्चित रूप से हो सकता है।