कुल्लू। हाई स्कूल चेष्टा में जातीय भेदभाव मामला सामने आने के बाद प्रशासन पूरी तरह चौकस हो गया है। इस तरह के मामलों पर त्वरित कार्रवाई के लिए अब टॉस्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। इस मामले के बाद अब डीसी युनूस शिक्षा उपनिदेशकों के अलावा खुद गुप्त सूत्रों से स्कूलों समेेत विभागों में जातीय भेदभाव को लेकर जानकारी जुटाएंगे और कहीं भी ऐसा पाया जाने पर त्वरित कार्रवाई करेंगे। कुल्लू जिला में सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए प्रशासन की भूमिका को लेकर डीसी युनूस से ‘अमर उजाला’ ने तीखे प्रश्न किए।
प्रश्न : 21वीं सदी में भी कुल्लू जिला में छुआछूत हो रही है। ऐसी सोच को प्रशासन खत्म नहीं कर पा रहा है। अब आगामी क्या कदम उठाए जाएंगे?
डीसी युनूस : हाई स्कूल चेष्टा के अलावा अन्य कहीं से भी ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। इस एपिसोड के बाद टास्क फोर्स गठित की जा रही है। जो इस तरह के मामलों पर नजर रखेेगी।
प्रश्न : स्कूल में जातीय भेदभाव मामलों में शिक्षक से पिटाई के डर से कुछ नहीं कर पाते हैं। प्रशासन ऐसे मामलों त्वरित हस्तक्षेप क्यों नहीं कर पा रहा है?
डीसी युनूस : प्रशासन के ध्यान में मामला आने पर त्वरित कार्रवाई की गई है। इसी उद्देश्य से टॉस्क फोर्स भी गठित की जा रही है। यह टॉस्क फोर्स त्वरित कार्रवाई अमल पर लाएगी।
प्रश्न : जातीय भेदभाव मामलों को रोकने के लिए अब तक प्रशासन ने क्या पग उठाए हैं?
डीसी युनूस : समय-समय पर विभागों को प्रदेश सरकार की गाइडलाइंस को लागू करने के निर्देश दिए जाते हैं। सभी विभागों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। शिविरों में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
प्रश्न : कई क्षेत्रों में अव्वल कुल्लू जिला में अभी भी कई कुरीतियां हैं। इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए प्रशासन अभी तक कुछ ठोस नहीं कर पाया है?
डीसी युनूस : कुछ माह पहले ही मासिक धर्म को लेकर नारी गरिमा कार्यक्रम शुरू किया गया है। भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर पग उठाए जा रहे हैं। जातीय भेदभाव मामलों पर भी प्रशासन की ओर से पहल की जा रही है।
प्रश्न : चेष्टा के अलावा अन्य कई स्कूलों में भी जातीय भेदभाव होने का खुलासा दलित संगठन कर चुके हैं। क्या प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा?
डीसी युनूस : मेरे ध्यान में चेष्टा स्कूल की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी। इसमें त्वरित कार्रवाई अमल पर लाई गई है। टॉस्क फोर्स के मिड डे मील के दौरान क्या हो रहा है, के बारे में भी जांच परख करेगी। बच्चों को नैतिक रूप से भी जागरूक किया जाएगा।
प्रश्न: चेष्टा स्कूल में जांच टीम के सामने भी मिड डे मील के दौरान स्वर्ण जाति के बच्चों ने खाना नहीं खाया। ऐसे में मैजिस्ट्रेट जांच का क्या औचित्य है?
डीसी युनूस : मैजिस्ट्रेट जांच पूरी तरह से स्पष्ट है। सामाजिक कुरीतियों को दूर करना सभी का दायित्व है। इन कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रशासन अपनी से हर संभव प्रयास कर रहा है। आमजन का भी इसमें सहयोग अपेक्षित है।