कुल्लू में बंसत पंचमी के मौके पर निकली भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा में भाग लेते श्रद्वालु।
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कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में सोमवार को जिला के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के सम्मान में वसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में वसंत पंचमी पर खूब गुलाल उड़ा। यहां वसंत पंचमी के अवसर पर होली सा नजारा देखने को मिला। इस अवसर पर राम और भरत के मिलन की परंपरा को भी निभाया गया।
इससे पूर्व सुल्तानपुर से भगवान रघुनाथ दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ढालपुर के लिए रवाना हुए। जगह-जगह उनकी शोभा यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर लाव-लश्कर के साथ करीब सवा एक बजे शोभा यात्रा ढालपुर स्थित रथ मैदान पहुंचे। भगवान रघुनाथ के साथ दियार के देवता त्रिजुगी नारायण भी ढालपुर पहुंचे। ढालपुर के रथ मैदान पहुंचते ही सारा मैदान जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। यहां पर भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूजा अर्चना के बाद राम भक्त हनुमान अपने प्रभु से मिलने पहुंचे। इसके बाद भव्य रथ यात्रा शुरू हुई। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और रथ खींच कर पुण्य कमाया। थोड़ी देर बाद अचानक भगवान रघुनाथ का रथ रूक गया। यहां पर राम भरत मिलाप की परंपरा को निर्वहन किया गया। राम भरत मिलन को देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। वहीं रथ को खींचने के लिए युवाओं में खासा जोश नजर आया। अस्थायी शिविर में पहुंचने के बाद भी भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। वैरागी समुदाय के लोगों ने भगवान रघुनाथ के चरणों में गुलाल अर्पित कर होली गीत गाए। इसके बाद अस्थायी शिविर में खूब गुलाल उड़ा। वसंत पंचमी कुल्लू में होली का आगाज देखने को मिला। अस्थायी शिविर में आए भगवान रघुनाथ के दर्शनों के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
अस्थायी शिविर में परंपराओं का निर्वहन करने के पश्चात सांय चार बजे के बाद भगवान रघुनाथ अपने लाव-लश्कर के साथ सुल्तानपुर के लिए निकल पड़े। वसंत पंचमी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। पर्व में आए विदेशी मेहमानों ने भी इस सुंदर नजारे को अपने कैमरों में कैद किया।
केबल तार ने रोकी रघुनाथ की सवारी
भगवान रघुनाथ जब लाव लश्कर के साथ रथ मैदान से अस्थायी शिविर की ओर बढ़े तो करीब 100 मीटर दूरी पर जाकर भगवान रघुनाथ का रथ अचानक रूक गया। रथ का छत्र एक केबल की तार में फंस गया। इसके बाद केबल की तार को हटाने के लिए युवकों को खूब मशक्कत करनी पड़ी। जब चाकू से भी तार न कटी तो भगवान रघुनाथ के साथ चलने 15-20 फीट लंबी पताका से तार को ऊंचा किया गया। इसके बाद भगवान रघुनाथ का काफिला आगे बढ़ा।