कुल्लू। फूड लाइसेंस की जगह पंजीकरण करवाने पर स्वास्थ्य विभाग ने शातिर व्यापारियों पर शिकंजा कस दिया है। बड़े व्यापारियों की ओर से पंजीकरण करवाने की आशंका पर स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी कर आईटीआर तलब की है। आईटीआर में रिटर्न 12 लाख से अधिक पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ पंजीकरण की जगह फूड लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
कुल्लू जिला में पंजीकरण वाले व्यापारियों की संख्या फूड लाइसेंस के मुकाबले कहीं अधिक है। स्वास्थ्य विभाग की जांच पड़ताल में कई बड़े व्यापारी भी पंजीकरण लिए हुए पाए गए। वहीं बड़े व्यापारियों को फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है। फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड एक्ट 2006 के प्रावधानों के अनुसार 12 लाख से अधिक रिटर्न वाले कारोबारियों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने पर फूड लाइसेंस लेना होता है, लेकिन कुल्लू में नियमों को दरकिनार कर कई व्यापारी धड़ल्ले से ही पंजीकरण के साथ ही काम चला रहे हैं। पंजीकरण की श्रेणी में छोटे दुकानदारों को लाया गया है। जिनकी सालाना रिटर्न 12 लाख रुपये कम है। कुल्लू जिला में अभी तक करीब पांच हजार लोगों ने पंजीकरण करवाया है। वहीं मात्र 211 कारोबारियों ने ही फूड लाइसेंस लिया है। पंजीकरण के लिए 100 रुपये प्रति वर्ष व 25 रुपये डाक के लिए चार्जिज लिए जाते हैं। जबकि फूड लाइसेंस के लिए चार्जिज अधिक हैं। फेक पंजीकरण को पकड़ने के लिए नामित अधिकारी भविता टंडन ने शक के आधार पर करीब 70 व्यापारियों को नोटिस जारी कर आइटीआर रिटर्न मांगी है। जिससे सही तरीके से पंजीकरण या लाइसेंस जारी किया जा सके।
इधर, स्वास्थ्य विभाग कुल्लू में तैनात नामित अधिकारी भविता टंडन ने बताया कि फूड लाइसेंस की जगह पंजीकरण लेने वालों करीब 70 व्यापारियों को संदेह के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। छानबीन कर नियमानुसार कार्रवाई अमल पर लाई जाएगी।