अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। घाटी के आराध्य देवता जुआणी महादेव और थान देवता के मंदिर में रविवार को भारी बारिश के बीच सुबह से देवलु और हारियान परिक्रमा करने में व्यस्त रहे। गूण बनाने के लिए विशेष घास की रस्सी और पराल को एकत्रित किया गया। पराल नामक घास को हर घर से एकत्रित किया गया। गूण टूटते हुए माहौल भक्तिमय हो गया।
देवता थान के कारकून ने पराल और बगड़ा से बनी रस्सी को जुआणी महादेव भंडार के प्रांगण में महादेव के देवलुओं को सौंपा। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच समस्त घाटी के लोग भी पराल और बगड़ा नामक घास से बने गूण यानी रस्सी के सहारे झूम उठे। गूण को देवता के कारकूनों की ओर से देवविधि के अनुसार तैयार किया था। परंपरानुसार अश्लील जुमलों से जुआणी महादेव और थान देवता के कारकून और हारियान महादेव के प्रांगण स्थित न्योली में भारी बारिश में खेल खेलते रहे। रविवार को गांव का माहौल कुछ ऐसा ही दिखा। खेल खेलते समय हारियान और देवलु एक दूसरे पर अश्लील जुमले कसते गए। जुआणी गांव से गूण को ढोल की थाप पर लाया गया और न्योली में देवता के पुराने अंगु के पेड़ में लपेट दिया। शाम ढलते ही दो देवताओं के हारियानों के बीच गूण तोड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। गूण दो हिस्सों में टूट गया, जो घाटी के लिए सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। गूण टूटने के बाद दिनभरअश्लील गालियों से गूंज रही घाटी का माहौल तुरंत भक्तिमय हो उठा। जुआणी महादेव के कारदार ओमप्रकाश महंत और थान देवता कारदार भोलाराम भंडारी ने कहा कि गूण के तीन टुकड़े होते हैं तो अशुभ माने जाते हैं। यह प्रचलन सदियों पुराना है। घाटी के बुजुर्गों के साथ नई पीढ़ी ने भी परंपरा को जीवंत रखा है। महादेव के 85 वर्षीय गांठीदार रामनाथ ठाकुर ने कहा कि उत्सव का आयोजन मर्यादा में रहकर ही किया जाता है।
हरिपुर में रही दियाली की धूम
हरिपुर (कुल्लू)। ऊझी घाटी मे दियाली पर्व के उपलक्ष्य पर रविवार को हरिपुर में दियाली की धूम रही। गांव के लोग टोलियों में घर-घर गए। गांव में टोलियों पर अखरोट फेंकने की रस्म भी पूरी की गई। हरिपुर गांव के सुभाष ठाकुर ने कहा कि गांव के लोग रविवार को इकट्ठे हुए और घर-घर जाकर पर्व मनाया। घनशायम, रमेश, दिनेश, गोपाल, गीता देवी, निमा देवी, निर्मला देवी, कुंती देवी, निहाल ने कहा कि हरिपुर के साथ लगते दशाल, सोयल, चकलाड़ी, मनसारी, गजां आदि गांवों में पारंपरिक पकवान तैयार किए गए।