ढूंढे नहीं मिल रहे लहसुन की खरीद फरोख्त के व्यापारी
उम्दा रेट न मिलने से किसानों ने घर पर ही किया स्टॉक
जिला में 1500 हेक्टेयर खेती में किया है लहसुन का उत्पादन
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। इस साल बाहरी राज्य के व्यापारी लहसुन की खरीद फरोख्त करने के लिए जिला में नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में किसान अपना उत्पाद को बेचने के प्रति काफी चिंतित हैं। मजबूरन ही किसानों ने लहसुन को घर पर ही स्टोर किया है। कम रेट मिलने के कारण किसान मंड़ियों तक लहसुन नहीं ले जा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि कम रेट के चलते खेती पर किया खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। इससे बेहतर तो घर पर ही लहसुन को रखना उचित है। दक्षिण भारत में इस वर्ष देश के अन्य राज्यों का लहसुन अधिक मात्रा में पहुंचा है। आपूर्ति अधिक होने के कारण मांग कम हो गई है। जिला कुल्लू में 1500 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन औसतन 14000 मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन होता है। गत तीन चार वर्षों से तो लहसुन का रेट काफी बेहतर मिला था लेकिन इस साल कम रेट मिलने से किसानों का खेती पर किया खर्चा भी पूरा होना मुश्किल हो गया है।
इस संबंध में घाटी के किसान अमित कुमार, अनूप ठाकुर, चमन, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, केहर सिंह, राजू, सजीव, प्रताप और केहर सिंह आदि के अनुसार इस वर्ष लहसुन की खरीद करने बाहरी व्यापारी कोई नहीं आ रहा है। लिहाजा उन्होंने फसल को सूखाकर अपने घरों में स्टॉक कर दिया है। उन्होंने सरकार से समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार किसानों ने लहसुन का बीज 100 रूपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा है। साथ ही खाद, दवा तथा मजदूरों के ऊपर अलग से खर्चा वहन किया है। कम कीमत से खेती का खर्चा पूरा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से लहसुन का समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। एपीएमसी कुल्लू के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि स्थानीय मंडियों में लहसुन 30 से 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।