बर्फ के बीच छह यात्रियों
ने पैदल लांघा रोहतांग दर्रा
चार लोग मनाली और दो लोग कोकसर सुरक्षित पहुंचे
कोकसर व मढ़ी में स्थापित हो चुकी हैं बचाव चौकियां
अमर उजाला ब्यूरो
कोकसर (लाहौल-स्पीति)। सीजन में बचाव चौकियां स्थापित होने के बाद पहली बार छह यात्रियों ने रोहतांग दर्रा को लांघा है। सभी छह यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गए हैं। गत दस मार्च को प्रशासन ने मढ़ी और कोकसर में रोहतांग दर्रा होकर पैदल आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बचाव चौकियां स्थापित कर दी हैं। इसके बाद अब रोहतांग दर्रा होकर पैदल आवाजाही शुरू हो गई है।
अब लाहौल घाटी से मनाली आने वाले और मनाली से लाहौल घाटी जाने वाले जरूरतमंद लोगों को अब हेलीकॉप्टर की इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पैदल आवाजाही शुरू होने से घाटी वासियों ने राहत की सांस ली है। बचाव चौकी के स्थापना के तीन दिनों बाद ही मंगलवार को पहली बार छह लोग दर्रे के आर पार हुए। इनमें चार पांगी घाटी के लोग मनाली की ओर से ब्यासनाला तक टैक्सी में आकर रोहतांग की सीधी चढ़ाई चढ़ कर दोपहर को कोकसर पहुंचे। वहीं कोकसर से पांच किलोमीटर आगे ग्रांफू तक दो लोग मनाली के लिए छोटे वाहन में आए। यहां से राक्षी ढांक की चढ़ाई पैदल पार कर रोहतांग पहुंचे तथा दोपहर बाद सुरक्षित मनाली पहुंचे।
बचाव चौकी कोकसर के प्रभारी पवन ठाकुर और बचाव चौकी मढ़ी के प्रभारी मोहन ने बताया कि दोनों चौकियों पर बचाव दल के तैनाती के बाद मंगलवार को पहली बार छह यात्रियों को कोकसर और मढ़ी के बचाव दल की मदद से रोहतांग दर्रा सुरक्षित पार करवाया है।
खराब मौसम में न लांघे रोहतांग दर्रा
खराब मौसम में रोहतांग दर्रा होकर पैदल आवाजाही खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में बचाव चौकी समेत प्रशासन ने मौसम की स्थिति को देखते हुए पैदल जाने का आग्रह किया है। मौसम खराब होने की सूरत पर बर्फबारी होने पर राहगीर फंस सकते हैं। ऐसे में दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
बिना पंजीकरण नहीं करें आवाजाही
मढ़ी और कोकसर बचाव दल के पास पंजीकरण करवाने के बाद ही रोहतांग दर्रा होकर आवाजाही करें जिससे किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। बिना पंजीकरण या बिना बताए रोहतांग दर्रा पैदल करने की कोशिश जानलेवा भी साबित हो सकती है।