अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिया से लेकर रामशिला तक इन दिनों फोरलेन निर्माण का कार्य जोरों पर है। इस बीच फोरलेन निर्माण में छोटे क्रेटवॉल लगाए जाने का मामला सामने आया है। पहाड़ी की कटिंग 50 फीट या इससे अधिक की गई है। जबकि भूस्खलन रोकने के लिए महज 20 फीट की क्रेटवाल लगाई जा रही है। ऐसे में वामतट पर जिया से लेकर रामशिला तक कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है।
करीब डेढ़ माह पहले खराहल के देवधार गांव में फोरलेन के चलते तीन मकानों में दरारें आ गई हैं। मकानों में दरारें आने से प्रभावित परिवार के लोगों को टीन के शेड में रातें बितानी पड़ रही हैं। जबकि, अन्य जगहों पर कटिंग से मकानों को खतरा पैदा हो गया है। फोरलेन के निर्माण में लगी कंपनी ने पहाड़ी की कटिंग कर रखी है। इसके बाद क्रेटवाल लगाए जाने हैं, लेकिन क्रेटवाल छोटे लगाए जाने से बारिश के दौरान कई मकान इसकी जद में आ सकते हैं। फोरलेन प्रभावित जयनारायण शर्मा, ओंकार शर्मा, कमलेश शर्मा, मोहित कात्यायन, उरज्ञान दोरजे आदि ने कहा कि फोरलेन कटिंग के कारण उनके मकानों और बगीचों में दरारें आ गई हैं। जितनी कटिंग की गई है, उसकी फिलिंग के लिए क्रेट वायर कम लगाई जा रही है। ऐसे में भूस्खलन का खतरा कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जो क्रेटवाल लगाए जा रहे हैं, जो मजबूत नहीं हैं। कंपनी मनमानी कर रही है। यह क्रेटवाल वजन सहन नहीं कर पाएंगे। उधर, एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी ने कहा कि देवधार में जिन मकानों में दरारें आई हैं उनका मौका किया गया है। प्रभावितों का कहना है कि क्रेटवाल छोटे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावितों की हरसंभव मदद की जाएगी।