राजा घेपन की छत्रछाया रहेगी बरकरार
कोकसरवासियों की सेवा से खुश हुए राजा घेपन
गूर टशी के माध्यम से कहा, बना रहेगा आशीर्वाद
अमर उजाला ब्यूरो
कोकसर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के आराध्य देवता राजा घेपन इन दिनों परिक्रमा पर हैै। नौ साल के लंबे अंतराल के बाद चंद्रा घाटी के अंतिम गांव कोकसर में पहुंचे राजा घेपन कोकसरवासियों की सेवा से खुश हुए हैं। देवता के शुद्धीकरण के लिए हल्का हिमपात भी किया है। जिसके बाद कोकसरवासियों में खुशी की लहर है।
इससे पहले मंगलवार को राजा घेपन के आगमन पर हर तरफ खुशी का माहौल देखने को मिला। राजा घेपन, देवी बोटी और माता जंगडूल के रथों ने गांव में प्रवेश करते ही महिलाओं ने देव रीति अनुसार भव्य स्वागत किया गया। रात को ग्रामीणों की ओर से जागरण आयोजन भी किया गया। सभी महिला पुरुष और देव हरुका नाच किया। बुधवार को कालका पूजा के वक्त घेपन ने गूर टशी के माध्यम से कहा कि कोकसर पहुंचने और यहां के लोगों के सेवा भाव से वह खुश है। हल्की बर्फबारी हुई है। वह शुद्धीकरण के लिए दी गई है। गूर छने कहा कि देव परंपराओं का पालन किया जाएगा तो उनका आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहेगा। सुबह कालका पूजा के बाद देवता गण घरों की परिक्रमा के लिए निकले। दोपहर 2 बजे के देवता डिम्फुक गांव के लिए रवाना हुए। जहां पर दो रात्रि जागरण का आयोजन किया जा रहा है। देवता के हरूका दोरजे ने बताया कि 8 दिसंबर को देवता सुबह ही सिस्सू के केवग गांव के लिए रवाना होंगे। रात्रि विश्राम यहीं पर होगा।