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सेब की फसल से अभी नहीं टला संकट

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apple shimla - फोटो : amarujala
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कुल्लू। बागवानी के लिए विख्यात कुल्लू घाटी में सेब की फसल से अभी संकट के बादल नहीं छंटे हैं। 15 जून तक आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का दौर जा रहेगा। मौसम विभाग ने दो से चार मई तक तेज आंधी-तूफान चलने की चेतावनी दी है। अभी तक मौसम में आए बदलाव से पड़ी कड़ाके की ठंड से सेब, प्लम को सबसे नुकसान आंका गया है। प्लम जहां 50 फीसदी से अधिक नुकसान पहुंचा है तो वहीं सेब को भी 30 फीसदी से अधिक से चपत लगी है। वहीं आंधी-तूफान व ओलावृष्टि ने भी बागवानों की चिंता को बढ़ा दिया है।
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मौसम के कहर से आनी, निरमंड, बंजार, कुल्लू, सैंज तथा लगवैली के बागवान बैकफुट पर आ गए हैं। उद्यान विभाग के विशेषज्ञ डॉ उत्तम पराशर के अनुसार इस बार सेब की बंपर पैदावार की उम्मीद थी लेकिन 15 अप्रैल के बाद पहाड़ों में हुई बर्फबारी से पड़ी कड़ाके की ठंड से कई जगहों पर सेब सेटिंग प्रभावित हो गई है। जबकि प्लम की फसल को पहले ही मार्च माह में नुकसान हुआ है। उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. राजकुमार शर्मा ने बताया कि मौसम में एकाएक आए बदलाव से बागवानी को करोड़ों को नुकसान पहुंचा है। सेब की फसल को कुछ क्षेत्रों में आंधी-तूफान व ओलावृष्टि से क्षति पहुंची है। विभाग इसका आकलन करने में जुटा है। बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2017 में कुल्लू जिला में करीब 97 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था। वहीं 2012-13 में 142834, 2013-14 में 175764, 2014-15 में 122400, 2015-16 में 143475 तथा 2017-18 में 89901 मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई थी।
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