देवी बोटी और राजा घेपन चंद्रा घाटी के रोपसंग पहुंचने पर स्वागत करते श्रद्घालु।
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कोकसर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल के आराध्य देव राजा घेपन और देवी बोटी मां जंगडुल के साथ इन दिनों लाहौल परिक्रमा पर निकले हुए हैं। देवी बोटी के हरुका और कारदार बिशन लाल ने बताया कि पांच दिसंबर को देवगण लाहौल के मुख्यद्वार कोकसर में पहुंचेंगे और दूसरे दिन 6 दिसंबर को कालका फेंकने के बाद दो दिनों तक डिंफुक गांव में परिक्रमा करेंगे। रात को जगराता होगा। छह दिसंबर की सुबह देवता के गुर और बाट मिलकर खुले आसमान के नीचे पूजा करेंगे। जिसमें लाहौल वासियों की सुख शांति के लिए पूजा पाठ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि घाटी में भारी बर्फबारी के बाद घेपन और देवी बोटी लाहौल परिक्रमा अधूरा छोड़ जाहलमा से अपने देव स्थल के लिए वापस लौट गए हैं। जिससे पट्टन घाटी के श्रद्धालुओं में काफी मायूसी छा गई थी। इसी कारण इस बार देवता दिसंबर के प्रथम सप्ताह में ही कोकसर पहुंच रहे हैं।
राजा घेपन कमेटी के प्रधान पूर्ण चंद ने बताया कि 27 और 28 नवंबर को देवता रोपसंग तथा 29 नवंबर से 3 दिसंबर तक गोमपथंग में होंगे और शाशिन में 4 दिसंबर को पहुंचेंगे। इसके बाद कोकसर में 5 दिसंबर को पहुंचेंगे। कोकसर पंचायत की प्रधान अंजू देवी ने बताया कि 5 दिसंबर को देवगणों के कोकसर आने पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। स्वागत तैयारी भी जोरों पर चल रही है।