कुल्लू। दुनियाभर में पर्यटन के लिए विख्यात कुल्लू-मनाली का पर्यटन कारोबार सिमट गया है। घाटी के पर्यटन स्थल सैलानियों के बिना सूने पडे़ हैं। दशहरा के बाद दिवाली का सीजन भी इस बार फीका ही रहा। दशहरा और दिवाली का कारोबार इस बीते साल के मुकाबले 50 फीसदी तक कम आंका गया है, लेकिन इन दिनों पर्यटन नगरी मनाली की आक्युपेंसी मात्र 10 फीसदी के आसपास ही चल रही है।
जिला के अन्य पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की चहलकदमी में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। सर्दी की दस्तक से घाटी के ट्रैकिंग सीजन के सिमटने से घाटी के खीरगंगा, मणिकर्ण, तीर्थन घाटी तथा जलोड़ी दर्रा आदि पर्यटन स्थलों की रौनक गायब हो गई है। होटल संचालकों ने भी अपने कर्मचारियों में छंटनी शुरू कर दी है। पर्यटन स्थल मणिकर्ण, खीरगंगा, जलोड़ी दर्रा, बंजार की तीर्थन, सोझा तथा बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर भी पर्यटकों के बिना सूने पड़ गए हैं। इन टूरिस्ट प्वाइंटों की रौनक गायब होने से पर्यटन कारोबारियों का धंधा चौपट हो गया है।
इस संबंध में कारोबारी कर्म सिंह, दीपन लाल, मोहर सिंह, जलोड़ी दर्रा के कारोबारी दिनेश कुमार, मोहर सिंह तथा जय चंद का कहना है कि समर सीजन के बाद ट्रैकरों से घाटी में रौनक बनी थी लेकिन अब ठंड बढ़ने से यहां सैलानियों की कदमताल ठहर गई है। होटल एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर ने कहा कि मनाली को न तो दशहरा कैश करवा पाया है और न ही दीवाली। अब विंटर सीजन पर नजरें टिकी हैं।