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हालड़ा में मशालों से भगाईं बुरी आत्माएं

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हालड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
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कोकसर (लाहौल-स्पीति)। पट्टन घाटी में सोमवार को देवी-देवताओं और बुरी आत्माओं को समर्पित हालड़ा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। बर्फ से लकदक पूरी घाटी मशालों की रोशनी से जगमगा उठी और लोगों ने पारंपरिक परिधानों के साथ इस रस्म को निभाया।
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अपने ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा की और बाद में ग्रामीणों ने मशालों को गांव के निर्धारित स्थान पर एकत्रित कर अलाव जलाया और बुरी आत्माओं को भिन्न भिन्न प्रकार के व्यंजन व पिंड अर्पित किए। पट्टन घाटी में हालड़ा पर्व की तिथि निर्धारित करने के लिए चंद्रमा के घटने बढ़ने के पक्ष को तरजीह दी जाती है। अनिल सहगल ने बताया कि तोद, गाहर और तिनंन घाटी में लामाओं की ओर से ग्रंथों के अनुसार तिथि तय की जाती है। तोद, गाहर तथा पट्टन के बाद इस बार तिनंन घाटी का हालड़ा और लम्होई 22 जनवरी को मनाया जाएगा। लाहौल की पट्टन घाटी में हालड़ा उत्सव हर वर्ष सर्दियों के दौरान चंद्रमास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। मान्यता है कि घाटी में सर्दियों के दौरान देवता स्वर्ग प्रवास पर चले जाते हैं। ऐसे में राक्षसों तथा आसुरी शक्तियों का बोलबाला अधिक रहता है। इन्हीं आसुरी शक्तियों और बुरी शक्तियों से निजात पाने के लिए मशाल उत्सव का आयोजन किया जाता है। मालंग निवासी मोहन लाल और अनिल सहगल ने बताया कि सर्वप्रथम सद हालड़ा निकाला जाता है, जिसमें बच्चों को भाग लेने की मनाही होती है। इसमें लोग कई प्रकार के पकवान बनाते हैं। हालड़ा उत्सव के ठीक 15 दिन बाद अमावस्या के दिन से घाटी के सभी गांवों में फागली उत्सव का दौर आरंभ हो गया है। इस मौके पर कृषि मंत्री राम लाल मारकंडा, पूर्व विधायक रवि ठाकुर, कांग्रेस अध्यक्षा ग्यालछन ठाकुर और जिप अध्यक्ष राजेश ने लोगों को बधाई दी है।
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