आईपीएच की अरबों रुपये की
योजनाएं बदलेंगी कुल्लू की तस्वीर
कुल्लू। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग कुल्लू जिला के लिए अरबों रुपये की योजनाओं का खाका तैयार कर रहा है। इनमें से कई योजनाओं को सरकार की मंजूरी मिल चुकी हैं, जबकि कई योजनाओं के कार्य आरंभ भी कर दिए गए हैं। पेयजल, सिंचाई, सीवरेज और बाढ़ नियंत्रण की ये विभिन्न योजनाएं आने वाले वर्षों में कुल्लू जिला के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी और जिला की तकदीर और तस्वीर बदल देंगी।
कुल्लू जिला में कृषि-बागवानी की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत लगभग 983 करोड़ रुपये की जिला सिंचाई योजना तैयार की गई है। इस योजना का लक्ष्य हर खेत तक पानी पहुंचाना है। प्रदेश सरकार ने अभी हाल ही में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत कुल्लू जिला की 13 सिंचाई योजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। 48 करोड़ 75 लाख रुपये की इन सिंचाई योजनाओं से 2164 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
जिला मुख्यालय कुल्लू, मनाली शहर और बंजार कस्बे को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग लगभग 40 करोड़ की तीन बड़ी पेयजल योजनाओं पर कार्य कर रहा है। इससे इन तीनों नगर निकाय क्षेत्रों के हजारों लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होगा। मनाली शहर के आस-पास 5-6 किलोमीटर के दायरे में आने वाले मुख्य पर्यटक स्थलों और गांवों को भी सीवरेज लाइन से जोड़ने के लिए विभाग ने लगभग 162 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। मनाली के निकट पलचान में बाढ़ नियंत्रण दीवार के लिए विभाग के माध्यम से 5 करोड़ 39 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
इधर, आईपीएच के अधीक्षण अभियंता देवेश भारद्वाज ने बताया कि कुल्लू जिला में इस वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न पेयजल, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, सीवरेज और अन्य मरम्मत कार्यों पर 38 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कुल्लू और मनाली शहर की पेयजल योजनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कुल 21 करोड़ 87 लाख का बजट आवंटित किया गया है।
ब्यास के दोनों किनारों का होगा सुंदरीकरण
आईपीएच ने पलचान से औट तक ब्यास नदी के तटीयकरण के लिए केंद्र सरकार की मदद से 1555 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इस डीपीआर में तटीयकरण, बाढ़ नियंत्रण और भू संरक्षण के सभी पहलुओं को शामिल करके ब्यास नदी के दोनों किनारों को विकसित करने का एक व्यापक खाका तैयार किया गया है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने से भू संरक्षण के साथ-साथ ब्यास के दोनों किनारों का सुंदरीकरण भी होगा और देश-विदेश के पर्यटक इस तरफ आकर्षित होंगे।