पतलीकूहल (कुल्लू)। जिला की बड़ी सब्जी मंडियों में से एक बंदरोल सब्जी मंडी का कारोबार पिछले करीब दस वर्षों से टेंट में चल रहा है। जिसके चलते अपना उत्पाद यहां लाने वाले किसानों बागवानों, आढ़तियों और लादानियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सालाना करीब सौ करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली इस सब्जी मंडी बंदरोल का अपना भवन तक नहीं है। सेब सीजन के दौरान खुले में बोली लगानी पड़ती है। नीलामी मंच न होने के चलते बागवानों को अपना उत्पाद खुले में रखने को मजबूर है। जिसके चलते कई बार ज्यादा धूप या बारिश में सेब के रंग रूप और आकार में बदलाव आ जाने से बागवानों को उचित दाम नहीं पाते हैं। वहीं विक्रय मूल्य कम होने के साथ फल लंबे समय तक नहीं रह पाता और सेब दागी हो जाने पर बीमारी पकड़ लेता है। परिणामस्वरूप इसे औने-पौने दाम में बेचना पड़ जाता है। पिछले दस वर्षों में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं, लेकिन किसी ने सब्जी मंडी की ओर ध्यान नहीं दिया। हालांकि पिछले साल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस सब्जी मंडी के भवन और नीलामी मंच के निर्माण का शिलान्यास भी किया, लेकिन यह कार्य शौचालय निर्माण और नींव से आगे नहीं बढ़ पाया। सब्जी मंडी के आढ़ती संघ के पूर्व सचिव श्याम ने बताया कि राजनीतिक बढ़त लेने के लिए स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री से इसका शिलान्यास तो करवाया, लेकिन बाद में काम करना भूल गए। सब्जी मंडी के आढ़ती संघ के अध्यक्ष गोवर्द्धन ठाकुर का कहना है कि नियमानुसार बंदरोल सब्जी मंडी का करोड़ों की लागत से नीलामी मंच के अलावा ग्रेडिंग पैकिंग और पार्किंग सहित बहुमंजिला भवन बनना है। बागवानों और बाहर से आए सेब कारोबारियों के लिए यहां एक गेस्ट हाउस बनाए जाने की घोषणा भी हुई है। बागवानों के हित में इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए। एपीएमसी के सचिव राघव सूद ने बताया कि सब्जी मंडी का काम चल रहा है। जल्द ही यह पूरा हो जाएगा। मनाली के विधायक गोविंद ठाकुर का कहना है कि भाजपा सरकार में इसके लिए एक योजना बनी थी। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और बात आगे नहीं बढ़ पाई। मनाली ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भुवनेश्वर गौड़ का कहना है कि उनके प्रयासों से ही सीएम ने सब्जी मंडी बंदरोल के कायाकल्प को करोड़ों का बजट जारी किया है।