ताक पर सरकार के निर्देश, स्कूली छात्राओं को नहीं मिल पा रहा लाभ
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के स्कूलों में सरकार के निर्देश ताक पर रखे गए हैं। घाटी के 30 फीसदी स्कूलों में सेनेटरी पैड वेडिंग मशीनें नहीं हैं।
सरकार ने छात्राओं के लिए स्कूलों को सेनेटरी पैड वेडिंग मशीन दी हैं, जिससे उन्हें स्कूल में ही आसानी से सेनेटरी पैड उपलब्ध हो सकें, लेकिन घाटी में छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकारी मापदंड के अनुसार सैनेटरी पैड की खरीद और वितरण के लिए स्कूल स्तर पर एक समिति का गठन होता है। इसमें स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, महिला शिक्षिक, आईसीडीएस सुपरवाइजर और एक एएनएम सदस्य शामिल होते हैं। स्कूलों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड वेडिंग मशीनें न होने से स्कूल प्रबंधनों की बड़ी लापरवाही है। ऐसे लगता है कि उनके लिए सरकार के दिशा-निर्देश कोई मायने नहीं रखते हैं। चिकित्सकों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान यह पैड सुरक्षात्मक परत देते हैं। सेनेटरी पैड को नियमित रूप में बदलने से स्वच्छता बनाए रखने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलती है।
यह है सेनेटरी पैड वेडिंग मशीन
सेनेटरी पैड वेडिंग एक स्वचालित मशीन है। इसे विशेष रूप से महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी पैड प्राप्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मशीन बालिकाओं या महिलाओं को समय पर आसानी और स्वच्छ तरीके से सेनेटरी पैड उपलब्ध करवाती है। मशीन से पैड लेने के लिए पांच रुपये डालने होते हैं। मशीन स्वचालित रूप से पैड को बाहर निकाल देती है।
डाइट प्रधानाचार्य का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय केलांग के प्रधानाचार्य रमेश कुमार ने कहा कि उनके ध्यान में किसी भी स्कूल का ऐसा मामला सामने नहीं आया है। अगर किसी स्कूल में इस तरह सरकार के आदेशों की अवहेलना की जा रही है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।