कुल्लू घाटी में सात सालों में बहे 103 लोग
नदी के किनारों पर सेल्फी लेने के चक्कर मेें गंवा रहे जान
2014 में 24 और 2017 में सात लोगों की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू में सेल्फी के चक्कर में और लापरवाही बरतने से नदियों में बहने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले सात सालों में बहने व डूबने से 103 लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल भी कुल्लू की वादियों में सात लोगों की मौत हुई है। जिसमें अधिकतर सैलानी ही शामिल हैं।
सबसे अधिक हादसे जिला मुख्यालय के साथ बहने वाली ब्यास और पार्वती नदी में हुए हैं। 2014 में सबसे अधिक 24 लोगों की मौत हुई है। गत साल 2016 में 21 लोगों की डूबने से जान चली गई है। इसमें कई पर्यटकों व लोगों की जान नदी किनारे या फिर नदी के बीच फोटो व सेल्फी लेने के चक्कर में गई है। जानलेवा बन रही सेल्फी के बावजूद कुल्लू-मनाली, मणिकर्ण व बंजार घाटी में सैर सपाटे को पहुंचने वाले सैलानी सुरक्षा को लेकर बेखौफ हैं। इस साल भी गत 30 नवंबर तक सात लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।
आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 10 मामले सामने आए हैं। जबकि 2012 में नौ, 2013 में 13, 2014 में 24, 2015 में 19, 2016 में तथा मामले पेश आएं हैं। इसमें रिवर राफ्टों के पलटने से भी कई पर्यटकों ने अपनी जान गवाई है। हालांकि इस साल 2016 के मुकाबले करीब तीन गुणा कमी आई है। पर्यटक व आम लोग नदी-नालों के किनारे न जाएं इसके लिए प्रशासन, पर्यटन विभाग व पुलिस ने जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगा कर आगाह किया है।
एसपी कुल्लू शालिनी अग्रिहोत्री ने कहा कि पुलिस पर्यटकों व आम लोगों की सुरक्षा के लिए सतर्क है। चेतावनी बोर्ड व साइन बोर्ड लगाने के बावजूद पर्यटक फोटो व सेल्फी लेने के चक्कर में नदी-नालों में उतर जाते हैं। उपायुक्त कुल्लू युनूस ने कहा कि प्रशासन ने जिला कुल्लू में करीब 100 संवेदनशील जगहों पर चेतावनी व साइन बोर्ड लगाए गए हैं। आने वाले सीजन में इसे और भी बेहतर किया जाएगा। उन्होंने कुल्लू घाटी में घूमने आने वाले पर्यटकों से नदी-नाले के आसपास न जाने की हिदायत दी है।