कुल्लू। सोशल मीडिया वर्तमान में प्रचार प्रसार का अहम साधन बनता जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना जल्द और अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। वहीं आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान प्रत्याशी सोशल मीडिया पर खुलकर प्रचार-प्रसार नहीं कर पाएंगे।
अगर चुनावों में खड़े होने वाले प्रत्याशी सोशल मीडिया जैसे व्हाटसएप, फेसबुक आदि का इस्तेमाल अपने चुनावी प्रचार के लिए करते हैं। तो यह प्रत्याशी के चुनावी खर्च में शामिल होगा। गौर रहे कि वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया का चुनावों पर असर देखने को नहीं मिला है। पांच साल पहले प्रदेश में दूरसंचार के हालात कुछ और थे लेकिन वर्तमान में सोशल मीडिया प्रचार का अहम जरिया बन चुका है। ऐसे में सोशल मीडिया चुनावों में अहम भूमिका अदा कर सकता है। चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर अगर प्रत्याशी ने वोट के लिए विज्ञापन डाला है। इस विज्ञापन को कहां से डिजाइन किया गया है। इसकी लागत क्या रही है। इसकी पूरी जानकारी प्रत्याशी को देनी होगी। इसके अलावा चुनावों को किए जाने मेसेज भी विज्ञापन ही माने जाएंगे। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त युनूस ने कहा कि चुनावों के दौरान प्रत्याशी के खर्चों पर नजर रखने के लिए विधानसभा क्षेत्र के अनुसार खर्चों को देखने वाले अधिकारी भी रहेंगे। जो जल्द ही जिला में नियुक्त होंगे। इसके अलावा ऑडिट टीम भी रहेगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चुनावों को लेकर विज्ञापन भी प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जुड़ेगा।