अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला में स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार हैं। आलम यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अलावा केलांग अस्पताल में स्वीकृत सात विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद लंबे अरसे से खाली चल रहे हैं। हर साल करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने के बावजूद जिला का सबसे बड़ा सामुदायिक अस्पताल केलांग महज रेफरल हेल्थ सेंटर बन कर रह गया है। यहां अस्पतालों में खांसी, जुकाम के अलावा किसी मर्ज का इलाज नहीं होता है।
लोकसभा चुनाव में स्वास्थ्य सेवाओं का मामला जोरशोर से उठेगा। प्रयोगशालाओं में बिना लैब तकनीशियन के करोड़ों के उपकरण जंग खा रहे हैं। चुनावी बेला पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने के सब्जबाग दिखा कर वोट ऐंठ लेते आ रहे हैं। लेकिन आज तक घाटी में स्वास्थ्य सुविधाएं रामभरोसे हैं। गर्भवती महिलाएं सर्दी शुरू होने से पहले ही प्रसव के लिए कुल्लू, मनाली का रुख कर लेती हैं। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को हर साल यहां की पंगु स्वास्थ्य सुविधाओं की मार झेलनी पड़ रही है। लोकसभा चुनाव में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। हालांकि कहने को घाटी की हर पंचायत में स्वास्थ्य केंद्र खुले हैं। लेकिन मरीजों को यहां मर्ज की बजाय दर्द ज्यादा मिलता है। स्थानीय निवासी अनिल, राकेश, विक्रम, सुरेश, तंजिन और रोहित का कहना है कि बाहरी जिलों के कर्मचारी लाहौल में अपनी सेवाएं देने से कतराते हैं। यहां पर विशेषकर सर्दियों में बीमार पड़ना किसी जोखिम से कम नहीं है। रोहित ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का मसला किसी एक पंचायत या फिर किसी एक उपमंडल का नहीं, बल्कि पूरे जिला का है। पंचायत प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार का कहना है कि लाहौल में गर्मियों की बजाय सर्दियों में अगर सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों को भेजे तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। कहा कि घाटी में गर्मियों की बजाय सर्दी के मौसम में रोहतांग दर्रा बंद होने के कारण अधिक परेशानी होती है।
जिले में इतना स्टाफ है कम
लाहौल-स्पीति में सीएमओ समेत सात विशेषज्ञ चिकित्सकों, 20 एमबीबीएस डॉक्टरों के पद खाली हैं। एक मैट्रन समेत 22 नर्स, दो चीफ फार्मासिस्ट के साथ 20 फार्मासिस्ट, सीनियर लैब तकनीशियन के सभी 16 पद और मेल हेल्थ वर्कर के 37 में से 25 पद खाली चल रहे हैं।
केंद्र सरकार से उठाया मामला
जिला भाजपा अध्यक्ष राजेंद्र बोध ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आते ही जिला के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के दर्जनों खाली पद भरे हैं। वर्तमान में 33 एमबीबीएस डॉक्टर लाहौल-स्पीति में सेवाएं दे रहे हैं। घाटी में सर्दियों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने राज्य और केंद्र सरकार से मामला उठाया है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए थे बड़-बड़े वादे
लाहौल-स्पीति कांग्रेस अध्यक्ष ग्यालसन ठाकुर ने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे। आज केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकारें है। इसके बाद भी जिले में सीएमओ समेत डॉक्टरों के 27 पद खाली चल रहे हैं। कहा कि उनके कार्यकाल में दो विशेषज्ञ डॉक्टरों को केलांग में तैनात किया था।
जिला के स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पड़े खाली पदों को लेकर हर महीने निदेशक स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भेजी जाती है। विभाग घाटी में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है।
-डॉ. तारा चंद, कार्यकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लाहौल-स्पीति