50 साल बाद भी डिस्पेंसरी को नहीं मिला भवन
कभी भी धराशायी हो सकती है आयुर्वेद डिस्पेंसरी
लोगों ने की नए भवन में स्थानांतरित करने की मांग
महेंद्र पालसरा
न्यूली (कुल्लू)। बंजार उपमंडल की सैंज घाटी के अति दुर्गम क्षेत्र शैंशर में चल रही आयुर्वेद विभाग की डिस्पेंसरी जर्जर भवन में चल रही है। करीब 50 सालों से चल रही डिस्पेंसरी भवन में न तो दवाइयां रखने को जगह है और न ही मरीजों को उठने बैठने की सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय पंचायत ने इसको लेकर कई बार आयुर्वेद विभाग को पत्र लिखा है, लेकिन कोई भी समस्या का हल नहीं हो सका है।
शैंशर घाटी के तुंघ, जलहरा, तलियाहारा, हड़ीनाला, बेंकर,धारथा, कइंथा, सिंहण, रोआड़, सरींभ, बरीउला, गउल, पचेड़ी, शफाड़ी, जयालू, वजाहरा, पटाहरा, धमाहिड़ी रेहड़ा, जंगला, सोइण, शरेड़ी, बड़ेहठा, बनाउगी, बागीशाड़ी, खाइण, मनाहरा, चनाहिड़, सनोगी तथा छतरादला के ग्रामीण इस आयुर्वेद डिस्पेंसरी पर निर्भर हैं। लेकिन, डिस्पेंसरी भवन जर्जर होने पर यहां मरीजों का उपचार करना खतरे से खाली नहीं है। भवन के दयनीय हालत होने से बारिश का पानी भी कमरों में घुसने लगा है। ग्रामीण बॉबी राम, तापे राम, राज कुमार, राम लाल तथा सोहन लाल का कहना है कि करीब 50 सालों से यह डिस्पेंसरी बदहाल भवन में चल रही है। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी की दशा देख कर लोग यहां अपना उपचार कराने से भी कतराते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विभाग ने नया भवन बना दिया है लेकिन बिजली की सप्लाई और शौचालय का निर्माण नहीं होने से इसे नए भवन में शिफ्ट नहीं किया गया है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों की सुविधा को देखते हुए जल्द डिस्पेंसरी को नए भवन में स्थानांतरित करने की मांग की है। उधर, लोनिवि के कनिष्ठ अभियंता हरीश ठाकुर ने कहा है कि पैसों की कमी होने के कारण यह अधूरा रह गया था। अब आयुर्वेदिक विभाग ने पैसा जमा करवा दिया है। जल्द इसका काम पूरा कर जनता को समर्पित किया जाएगा।