जनजातीय हलकों से मार्कंडेय मंत्री पद के प्रबल दावेदार
तीसरी बार चुनाव जीतकर पहुंचे विधानसभा की दहलीज
2007 में पहली बार मार्कंडेय ने पार्टी को दिलाई थी जीत
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। पूर्व मंत्री डा रामलाल मार्कंडेय चुनाव जीत कर जनजातीय हलकों से मंत्री पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार के तौर पर उभरे हैं। किन्नौर से भाजपा प्रत्याशी तेजबंत नेगी के चुनाव हारने से मार्कंडेय की मंत्री बनने की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं। वह तीसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए हैं।
इससे पहले रामलाल मार्कंडेय ने वर्ष 1998 में हिविंका-भाजपा गठन के प्रत्याशी के तौर पर पहला चुनाव जीता था। चुनाव जीतने के बाद मार्कंडेय गठबंधन सरकार में मंत्री बने थे। वर्ष 2007 में मार्कंडेय ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर एक बार फिर लाहौल स्पीति विधानसभा से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री फुंचोग राय को शिकस्त दी थी। हालांकि वर्ष 2007 में वह भाजपा सरकार में मंत्री नहीं बन सके। लेकिन वह शीत मरूस्थल में पहली बार कमल खिलाने में सफल हुए थे। इस बार प्रदेश के तीन जनजातीय हल्कों में से भाजपा के दो प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए हैं। चंबा जिला की भरमौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी जिया लाल ने अपना पहला चुनाव जीता है। जबकि किन्नौर से तेजवंत नेगी चुनाव हार गए हैं। ऐसे में मार्कंडेय का मंत्री बनना तय माना जा रहा है।
चुनाव जीतने के बाद ‘अमर उजाला’ से बातचीत में मार्कंडेय ने कहा कि किसे मंत्री पद दिया जाना है। यह पार्टी संगठन और हाईकमान का विशेषाधिकार है। उनकी जीत के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर काम किया है। घाटी में पर्यटन का विकास उनकी पहली प्राथमिकता है। जबकि पिछले कांग्रेस कार्यकाल में रुके हुए विकास कार्यों को पुन: गति प्रदान करेंगे। वहीं रोहतांग टनल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उद्घाटन करवाना उनकी प्राथमिकता है। चुनाव जीतने के बाद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लाहौल स्पीति की जनता का एक समान विकास करेंगे।