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सेब के बगीचों में बरपा कैंकर रोग का कहर

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सेब के बगीचों में कैंकर रोग का प्रकोप
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बागवान परेशान, इस बीमारी से सूख रहे हरे भरे पेड़
नाशपाती के पौधों में भी दिख रहा बीमारी का असर
उमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू के बगीचों में पतझड़ के बाद कैंकर रोग का कहर बगीचों में स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है। इस रोग से सेब के पौधों को काफी नुकसान हो रहा है। इस कारण बागवान खासे चिंतित हैं। बागवानों का कहना है कि इन दिनों प्रूनिंग करते समय बगीचों में बीमारी साफ दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि सेब के साथ अब रोग का कहर नाशपाती के पेड़ों में भी तेजी से पनप रहा है।
बागवानों का कहना है कि पुराने पेड़ों पर इस बीमारी का असर ज्यादा नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंकर रोग के लक्षण पौधे के तने, शाखाओं और टहनियों पर उभरे या धंसे हुए अनेक रंगों के धब्बों के रूप में नजर आते हैं। रोगी पौधों की छाल कई बार पपड़ी बनकर उखड़ जाती है। ऐसे में पौधे भी सूख जाते हैं। इसके चलते बागवानों को वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूबे में सेब के पौधों में विभिन्न प्रकार के पंद्रह कैंकर रोगों को देखा गया है। ये सभी कैंकर रोग फूंफद जनित हैं। मुख्य रोगों में भूरा तना कैंकर, धुंए वाला -झुलसा कैंकर, गुलाबी कैंकर, काला तना, नेल हैंड, रजत पती कैंकर है। घाटी के बागवान ज्ञान ठाकुर, देवराज नेगी, सुरेश, अखिल ठाकुर, हुकम ठाकुर, रोशन लाल, जितेंद्र ठाकुर, किरण शर्मा, नीतिश, प्रशांत और अनूप ने कहा कि बगीचों में कैंकर रोग से कई पौधे सूख रहे हैं। अब यह रोग नाशपाती के पेड़ों में भी पनप रहा है। इससे बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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ऐसे करें फलदार पौधों का उपचार
कैंकर रोग की रोकथाम के लिए संतुलित खाद डालनी चाहिए। बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने कहा कि पौधे की कांट-छांट उचित तरीके से करनी चाहिए। कैंकर के घाव पर तेज चाकू से साफ करके उस पर व्लाइटॉक्स या चौबाटिया पेंट लगाना चाहिए। बागवान फल तोड़ने के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराड का 300 ग्राम प्रति सौ लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
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