कुल्लू। जिया से रामशिला तक निर्माणाधीन फोरलेन में नियमों का दरकिनार किया जा रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद ब्यास नदी में धड़ल्ले से मलबा डंप किया जा रहा है। अवैध रूप से डंप किए जा रहे मलबे से ब्यास नदी समेत वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है। बार-बार चेतावनी और जुर्माने के बावजूद नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) मनमानी कर रहा है।
जिया से रामशिला तक इन दिनों फोरलेन का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। पहाड़ कटिंग का काम किया जा रहा है, लेकिन यहां से निकलने वाले मलबे को सही तरीके से सही जगह पर डंप नहीं किया जा रहा है। दिनदिहाड़े मलबे को टिप्पर से ब्यास नदी की ओर फेंका जा रहा है। पहले भी वन संपदा को नुकसान पहुंचाने पर वन विभाग व प्रशासन एनएचएआई को नोटिस जारी कर चुका है। एक मामले में साढ़े पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। दो बार नोटिस जारी होने के बावजूद एनएचएआई की तरफ से नियमों को दरकिनार किया जा रहा है और प्रशासन की चेतावनियों को अनदेखा किया जा रहा है। जिसका पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ब्यास नदी को स्वच्छ रखने को लेकर एनजीटी पहले ही सख्त रवैया अपना चुका है, बावजूद इसके सरकारी विभाग ही नदी को नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं। पूर्व में वन विभाग की ओर से नोटिस के बाद करीब साढ़े पांच लाख रुपये जुर्माने जुर्माना लगाया था। इसके बाद मामला पुन: डीसी युनूस के ध्यान में आने पर एनएचएआई को नोटिस भेजा गया था। बावजूद अवैध डंपिंग जारी है। इधर, डीएफओ कुल्लू डॉ नीरज चड्ढा ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। नियमानुसार कार्रवाई अमल पर लाई जाएगी।