पुरातन कुल्लू में हौरन नृत्य से जुटाई जाती थी आर्थिक सहायता
मनोरंजन से धन एकत्रित करने के लिए पुरूष करते हैं हौरन नृत्य
अब संस्कृति को जीवंत रखने के लिए हो रहा हौरन नृत्य
मनु शर्मा
मनाली (कुल्लू)। पुरातन कुल्लू में हौरन नृत्य के माध्यम से आर्थिक सहायता जुटाई जाती रही है। धन एकत्रित करने के लिए पुरूष जगह-जगह जाकर हौरन नृत्य करते रहे हैं। लोगों का मनोरंजन करने की एवज में उनसे धन जुटाया जाता है। जिसका उपयोग मंदिर प्रतिष्ठा समेत अन्य कार्यों में किया जाता है।
पुरातन कुल्लू में विभिन्न नृत्य शैलियां हैं, लेकिन हौरन नृत्य का अपना अलग महत्व है। हौरन नृत्य में हिरण का मुखौटा पहना जाता है। जिसके साथ अन्य कलाकार भी मुखौटे पहनकर नृत्य पेश करते हैं। लोगों का मनोरंजन कर कई कार्यों के लिए धन जुटाया जाता है। हालांकि अब इस नृत्य का प्रचलन बेहद कम रहा है। मात्र केवल संस्कृति को बचाने के लिए सार्वजनिक मंचों पर ही इसे देखा जा सकता है। पिछले तीन सालों से विंटर कार्निवाल के दौरान इस नृत्य को पेश किया जा रहा है। जिसमें महिला मंडल की सदस्य विभिन्न रूप धर कर मनाली माल रोड पर पहुंच रही हैं। बाहरी राज्यों समेत हिमाचली पर्यटकों के लिए भी यह नृत्य आकर्षण का केंद्र है। इस नृत्य के लिए अलग से प्राचीन गाने भी हैं।
इधर, पर्यटक राजेंद्र, मोहन, शमशेर, रोहन, प्यारे मोहन, दलीप और अन्य ने बताया कि कुल्लू की लोक संस्कृति को देख बेहद खुशी मिली है। स्थानीय बोली के गाने तो समझ नहीं आए, लेकिन देखकर ही नृत्य बेहद आकर्षक लग रहा था। इधर, एसडीएम मनाली एचआर बेरवा ने बताया कि लोक संस्कृति के संवर्द्धन के लिए हरसंभव पग उठाए जा रहे हैं। भविष्य में भी इस तरह के लोक नृत्य पेश किए जाएंगे।