अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू।
जिला कुल्लू में सूखे से राहत नहीं मिल पाई है। पिछले हफ्ते घाटी की चोटियों में हल्की बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश हुई लेकिन यह नकदी फसलों के लिए नाकाफी है। सूखे से लहसुन की फसल प्रभावित होने लग पड़ी है। जिले में अढ़ाई माह से चल रहे सूखे से लहसुन की पौध पीली पड़ने लगी है। इससे किसान चिंतित हैं।
जिला कुल्लू में 1200 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती की गई है। बंजार, सैंज, बदाह, भुंतर, बजौरा, गड़सा तथा बाह्य सराज आनी में बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती की जाती है। सूखे के चलते किसान लहसुन की निराई भी नहीं कर पा रहे हैं।
किसान रमेश ठाकुर, भगवान दास, लीला चंद, खेम राज, हेम राज, बेली राम, कमल ठाकुर, गीता देवी, सत्य देवी, मथरा देवी तथा सुंदर सिंह ने कहा कि सूखे से घाटी के किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है।
बारिश न होने से नकदी फसल लहसुन की पौध पीली पड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले एक हफ्ते में बारिश नहीं हुई तो किसानों की आर्थिकी पर भारी संकट खड़ा हो जाएगा। कहा कि सिंचाई सुविधा न होने से लहसुन की फसल बारिश पर निर्भर है।
उधर, कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. रत्न भारद्वाज ने कहा कि अभी नकदी फसल लहसुन को खतरा नहीं है। बीते दिनों हुई बारिश से इसका असर कृषि को हुआ है।
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