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यहां बेटा ही नहीं बेटी के जन्म पर भी होता है जश्र

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उदयपुर (लाहौल स्पीति)। एक ओर देशभर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं जनजातीय क्षेत्र लाहौल का एक ऐसा गांव भी है जहां बेटी के जन्म पर पारंपरिक त्योहार गोची पर खूब जश्न मनाया जाता है। लामाओं द्वारा खास दिन निकालकर बड़े धूमधाम से इस उत्सव का आयोजन किया जाता है। आराध्य देव तंगजर की छत्रछाया में पल रहे प्यूकर गांव की बात ही निराली है। यहां बेटे ही नहीं बल्कि बेटी के जन्म पर भी घर में उत्सव का माहौल होता है। प्यूकर गांव में गोची उत्सव के बीच साल भर में जितने बच्चे पैदा हुए चाहे वे बेटा हो या बेटी, उतने ही जश्न मनाए जाते हैं। 20 घरों की आबादी वाले प्यूकर गांव में सदियों से चली आ रही परंपरा का आज भी निर्वहन किया जाता है। जिला मुख्यालय केलांग से सात किलोमीटर दूर वामतट पर बसे प्यूकर गांव में गोची उत्सव का आगाज इस बार 20 जनवरी के बाद होगा। जिन घरों में सालभर में बच्चे पैदा हुए हैं, उनमें खूब जश्न का माहौल रहेगा। इस वक्त प्यूकर गांव में नवंबर तक एक ही बच्ची पैदा हुई है। अब ग्रामीण उत्सव के मौके पर अभिभावकों को शगुन के तौर पर जूब आदि देकर बधाई देंगे। बरबोग पंचायत के प्यूकर गांव में गोची उत्सव पर मेल-मिलाप, पारंपरिक संस्कृति धार्मिक अनुष्ठान भी होता है। स्थानीय छिमे दोरजे, सोनम दवा, नोरवू, यंगजिन, पलजोर, पूर्व प्रधान छेरिंग डोलमा, तंगजर देवता पुजारी ज्ञलसन ने कहा कि प्यूकर में इस बार 20 जनवरी के बाद गोची उत्सव मनाया जाएगा। उत्सव में तीरदांजी भी होगी। इसमें भोज पत्र पर याक की आकृति बनाई जाती है। तंगजर के पुजारी इस आकृति पर तीर छोड़ते हैं। हालांकि, तीरदांजी से महिलाएं दूर ही रहती हैं। गांव में बेटा या बेटी हो लेकिन जश्न फीका नहीं होता।
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