कुल्लू। मंगलवार रात्रि को बर्फबारी सेब बगीचों तक नहीं पहुंच पाई है। बर्फ जिला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक ही सीमित होकर रह गई है। जिससे बागवान काफी निराश हैं। इधर बर्फ न गिरने से चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो पाने का खतरा मंडराने लगा है। सेब के चिलिंग आवर्स पूरे न होने से इसका असर आगामी फसल पर भी पड़ सकता है।
जिला कुल्लू की उझी घाटी, खराहल घाटी, मणिकर्ण घाटी और सैंज आदि क्षेत्र में बर्फ न गिरने की मार बागवानी पर भारी पड़ सकती है। मंगलवार रात को उपमंडल बंजार के सराज क्षेत्र में बर्फबारी हुई। इस क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बर्फ सेब बगीचों तक पहुंच ही नहीं पाई। करीब डेढ़ माह के सूखे के बाद मंगलवार को बारिश व बर्फबारी हुई थी लेकिन बर्फबारी के पहाड़ों तक ही सीमित रहने के कारण बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ा।
इधर, बुधवार को भी मौसम साफ रहा। बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू होने के बाद बागवानों को उम्मीद थी कि सेब से कुल्लू घाटी बर्फ से लकदक हो जाएगी। बागवान रमेश ठाकुर, बलवंत राणा, सुनील राणा, प्रदीप कुमार, बेली राम, पोषू राम और तारा चंद ने कहा कि सेब फसल के लिए बर्फबारी बेहद जरूरी है। इस सर्दी में सेब बगीचों तक बर्फ नहीं पहुंच पाई है। बर्फबारी के न होने से अब सेब के चिलिंग आवर्स भी पूरे न होने का खतरा मंडराने लगा है। जनवरी माह के समाप्त होने के बाद पलम और आडू में स्पर फूटना शुरू हो जाएंगे। ऐसे में अब सेब बगीचों में बर्फबारी की संभावना धूमिल हो गई हैं।