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रथ मैदान में महिलाओं ने पारंपारिक नाटी डाल मांगा सम्मान

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रथ मैदान में पारंपरिक नाटी डाल
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कर महिलाओं ने मांगा सम्मान
एक घंटे तक चली महानाटी से रूढ़िवादी सोच पर किया प्रहार
महिलाओं ने पारंपरिक पट्टू और धाठू में सजकर किया कुल्लवी लोकनृत्य
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। कुल्लू के रथ मैदान में मंगलवार को एक साथ करीब तीन हजार महिलाओं ने पारंपरिक नाटी डाल कर अपना सम्मान मांगा। एक घंटा चली इस महानाटी से रूढ़िवादी सोच पर प्रहार किया गया। करीब 12 बजे शुरू हुई इस महानाटी में सबसे पहले नारी गरिमा पर आधारित लोकगीतों पर नाटी डाली गई। बाद में करीब एक घंटे तक अन्य लोक गीतों पर थिरक कर महिलाओं ने नारी गरिमा संदेश दिया।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के पांचवें दिन नारी गरिमा थीम पर महानाटी डाली गई। जिला भर से आई महिलाओं ने पारंपरिक पट्टू और धाठू में सजकर एक साथ कुल्लवी लोकनृत्य किया। करीब 12 बजे महानाटी का आगाज हुआ। 15 मिनट तक नारी गरिमा गानों पर नाटी डाली गई। इसके बाद इशारा मिलते ही महिलाओं ने रथ मैदान में लाल, पीले रूमाल लहराए। वाद्ययंत्र और शहनाई की गूंज के साथ नाटी आरंभ हुई। नाटी में सबसे पहले भौरू गाए गए। इसके बाद ढीली नाटी डाली गई। ऐसा डेहरी बागा, खेलजी ऐजे मेरी, बुधूआ मामा, हाडे मामुआ हो, छिड़ी चुघणी झुक्का माक्का, बेटी सा अनमोल, बाकी पौटू आलिये, विदा लागी दशमी, देश शोभला, रेड सेउए रा, वेद राम ठाकरा, चोल घौरा वे जाणा चिडूआ और अन्य लोकगीतों पर महिलाओं ने नाटी डाली। नाटी के माध्यम से कुल्लू में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान गोशाला और घर से बाहर रखने के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि अब इस परंपरा को बदलने की जरूरत है। महिलाओं से मासिक धर्म के दौरान छुआछूत बंद होगी तभी नारी की गरिमा बनी रहेगी।
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देव आदेश का माना जाता है उल्लंघन
जिला कुल्लू के दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आज भी मासिक धर्म के दौरान गोशाला या घर से बाहर रखा जाता है। वह किसी चीज को छू नहीं सकती है। वह अपने घर के अंदर नहीं जा सकती है ऐसा करने पर देव आदेश का उल्लंघन माना जाता है। मासिक धर्म के दौरान महिला से होने वाली छुआछूत, भ्रांति को समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन नारी गरिमा अभियान चलाया है।
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87 पंचायतों में पाई गई दिक्कत
जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र आर्य ने कहा कि प्रशासन के सहयोग कुल्लू जिला में एक जनवरी 2018 को यह अभियान शुरू किया गया था। जिला की 87 पंचायतों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं से होने वाले भेदभाव की बात सामने आई है।
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