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अब बीपीएल के लिए देना होगा शपथ पत्र

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों (बीपीएल) के चयन की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया है। सरकार ने इस प्रक्रिया में संशोधन करते हुए अब बीपीएल परिवार के लोगों को शपथ पत्र देना होगा। इसके लिए सरकार ने कुछ बिंदुओं को निर्धारित किया है। जो इन इन्हें पूरा करता है, उन्हें ही गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में शामिल किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
बीपीएल में शामिल होने के लिए परिवार को दो हेक्टेेयर से ज्यादा असिंचित भूमि और एक हेक्टेयर से ज्यादा सिंचित भूमि नहीं होनी चाहिए। परिवार के पास आधुनिक शहरी प्रकार का पक्का मकान न हो। परिवार आयकर नहीं देता हो। परिवार की वेतन, पेंशन, भत्ते, मानदेय, मजदूरी व व्यवसाय आदि से नियमित मासिक आय 2500 रुपये से अधिक, परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी अथवा गैर सरकारी नौकरी में नियमित तौर या अनुबंध पर कार्यरत न हो। बीपीएल परिवार के एक सदस्य को कम से कम मनरेगा में एक साल में 20 दिन कार्य करना अनिवार्य है। अगर कोई परिवार इस शर्त को पूरा नहीं करता है तो ग्राम सभा की ओर से ऐसे परिवार का नाम बीपीएल सूची से काटा जा सकता है। बीपीएल परिवार के एक पात्र सदस्य को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना या राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्थानीय स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। नए संशोधन में बीपीएल परिवार का कोई सदस्य अगर परिवार से अलग होता है तो उस अवस्था में बीपीएल के लिए आवेदन करता है तो ऐसे नए परिवार को लगभग तीन साल तक बीपीएल के दायरे में नहीं लाया जाएगा। साथ ही अविवाहित लोग बीपीएल के लिए अलग परिवार नहीं माने जाएंगे।
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तो दूसरी पंचायतों में समानुपात में बांटा जाएगा
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज के विशेष सचिव राकेश कंवर ने कहा कि सरकार ने फैसला किया है कि अगर कोई ऐसी पंचायत होगी, जहां एक भी परिवार बीपीएल में नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के बीपीएल परिवारों के लक्ष्य को संबंधित उपायुक्त की ओर से उसी विकास खंड की किसी दूसरी पंचायतों में समानुपात में बांटा जाएगा। उस जिला व विकास खंड में बीपीएल का कोटा यथावथ रहेगा। विभाग की ओर से प्रदेश में हर साल अप्रैल माह में होने वाली ग्राम सभा की प्रथम बैठक में बीपीएल सूची की समीक्षा की जाएगी।
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