अब नाशपाती के बगीचों में
कैंकर बीमारी का हमला
सूखे के कारण रोग का बढ़ा प्रकोप, बागवान चिंतित
बागवान बीमारी से ग्रस्त पेड़ों को काटने को मजबूर
उमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। लगातार सूखे के कारण सेब बगीचों के बाद अब नाशपाती के पौधों पर भी कैंकर बीमारी ने हमला बढ़ गया है। ऐसे में बागवानों को रोग ग्रस्त पौधों को काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस साल बर्फबारी और बारिश पर्याप्त मात्रा में नहीं होने से कई बीमारी पनप रही हैं। जिससे बागवान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
बागवानों का कहना है कि विशेषज्ञों की ओर से बताई जा रही दवाइयां के लेप लगाने और छिड़काव के बावजूद बीमारी पर अंकुश नहीं हो रहा है। ऐसे में कैंकर की चपेट में आ रहे पौधों को मजबूरन काटकर बगीचों को बचा रहे हैं। बागवानों का कहना है कि इस बार बर्फबारी और बारिश न होने से रोग अधिक पनप रहे हैं। सामान्य से अधिक गर्मी से आगामी सेब, नाशपाती और गुटलीदार फलों की पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। इस सप्ताह बारिश न हुई तो नमी के अभाव में फ्लावरिंग समय से पहले ही हो जाएगी। इससे उत्पादन पर विपरीत असर हो सकता है।
इस संबंध में घाटी के बागवान अमित कुमार, रोशन लाल, ज्ञान ठाकुर, चंदे राम, युवराज ठाकुर, महेश शर्मा, चुनी लाल, अशोक ठाकुर, अखिल राणा, सतीश ठाकुर, महेंद्र ठाकुर और वेद ठाकुर आदि का कहना है कि मौसम की बेरुखी के कारण नाशपाती के पौधे कैंकर रोग की चपेट में आ रहे हैं। नमी के अभाव में फलदार पौधों पर कीट पतंगों का हमला अधिक होने लगा है।
इस संबंध में उपनिदेशक डॉ आरके शर्मा कहते हैं कि कैंकर एक सामान्य बीमारी है। जिन टहनियों पर रोग का कहर है, उस स्थान को तेज चाकू से पहले साफ करें और इसके बाद ब्लाइटाक्स का घोल आलसी के तेल के साथ टहनियों पर लगाएं या तो बागवान चौबाटिया पेस्ट को भी लगा सकते हैं। इससे बीमारी पर नियंत्रण होगा।