उदयपुर (लाहौल-स्पीति)।
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के अधिष्ठाता देवता राजा घेपन एकाएक जाहलमा गांव से अपने देवालय लौट गए हैं। इससेे घाटी के हजारों लोगों में मायूसी है। घाटी के अधिकतर लोगों को उम्मीद थी कि देवता की परिक्रमा के दौरान वह उदयपुर स्थित मृकुला देवी मंदिर में मिलन को जाएंगे और वहां देवता के दर्शन कर पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
सोमवार को अचानक देवता जाहलमा गांव से ही अपने देवालय लौट गए। 18 सितंबर को घाटी के फूड़ा गांव में देवी हिडिंबा का राजा घेपन और देवी वोटी तथा अठारह नाग का भव्य देव मिलन हुआ था। इसके बाद देवता की रथयात्रा में देवी हिडिंबा भी शरीक हुई थीं। इस बीच राजा घेपन, देवी वोटी, अठारह नाग और देवी हिडिंबा पूरे लाव लश्कर केे साथ जाहलमा गांव होते हुए जगह-जगह रात्रि ठहराव के बाद उदयपुर स्थित मृकुला देवी मंदिर में पहुंचना था।
यहां 30 नवंबर को होने वाले भव्य देव मिलन और धार्मिक रस्म की अदायगी के बाद देवता अपने देवालय लौटने थे। पट्टन घाटी के सुरेश कुमार, राकेश लाल, महेंद्र सिंह तथा पन्ना लाल का कहना है कि देवता राजा घेपन की रथयात्रा पूरी न होने से घाटी के लोगों में अपने अधिष्ठाता के दर्शन न करने से मायूसी है। राजा घेपन कमेटी के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने बताया कि अब राजा घेपन और देवी वोटी 2020 में लाहौल परिक्रमा पर निकलेंगे।