अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। उद्यान विभाग ने बागवानों को बगीचों में फल विकास अवस्था में माइकलोवुटानिल, मैनकोजेब या प्रोपीनेव दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाइयों के छिड़काव से स्कैब और असामयिक पतझड़ व अन्य बीमारी से निजात मिलेगी।
बगीचों में इस समय फलों का विकास हो रहा है। बागवानों का कहना है कि सेब का आकार अखरोट के बराबर हो चुका है। सेब में गुणवत्ता और रोग से बचाने के लिए बागवान काफी मेहनत कर रहे हैं। जिले में अच्छी फसल की स्थिति में करीब एक करोड़ पेटी का उत्पादन होता है। लेकिन इस साल कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि और अंधड़ ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। अभी जून माह में ड्रॉपिंग होनी बाकी है। इसके बाद ही फसल का सही आंकलन हो सकता है। घाटी के बागवान अमित, रामनाथ, बुुद्धि प्रकाश शर्मा, लाल चंद, महेंद्र ठाकुर, चुनी लाल, कैलाश ठाकुर, झाबे राम ठाकुर, सुरेश कुमार, प्रताप पठानिया, देवराज, प्रेम ठाकुर, अनिश ठाकुर, अखिल ठाकुर, ज्ञान ठाकुर तथा अनूप भंडारी आदि का कहना है कि स्कैब और असामयिक पतझड़ व माइट जैसे रोग के नियंत्रण के लिए विभाग की सलाह के अनुसार बगीचों में स्प्रे कर रहे हैं। बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निजात पाने के लिए सिंचाई वाले इलाके में सिंचाई जरूर करें।
फल विकास अवस्था में बागवानों को माइकलोवुटानिल 80 ग्राम या मैनकोजेब 600 ग्राम या प्रोपीनेव 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिए विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
-राकेश गोयल, उपनिदेशक उद्यान विभाग