अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। ठंड के मौसम में सर्दी और जुकाम जैसी बीमारियों से निजात पाने के लिए अमूमन लोग जड़ी, बूटियों या फिर अन्य आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार करते हैं। लेकिन लगघाटी के शांगना गांव में देसी उपचार से एक दंपती की मौत हो गई। ऐसे में देसी उपचार जानलेवा बन गया।
कुल्लू जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. विक्रम कटोच ने कहा कि सर्दी, जुकाम आमतौर पर मौसम और वायरल से होता है। बिना दवा खाने से ही दो सेे तीन में खत्म हो जाता है। इसके बावजूद अगर वायरल ज्यादा हो तो इधर-उधर की दवा न खाएं और बिना सलाह के कोई भी दवा न लें। मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जाकर अपना उपचार करवाएं ,जहां दवाईयां भी निशुल्क हैं। उन्होंने कहा कि कडु वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित नहीं है। बिजली बोर्ड में तैनात फागनू राम तथा उनकी पत्नी चांदी देवी की एक साथ मौत होने से परिजन सदमे में है। उनके दो बेटे हैं और एक बेटा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुल्लू के बतौर पीएसओ तैनात है। उनको शुक्रवार सुबह जैसे ही अपने माता-पिता की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो वह तुरंत अस्पताल पहुंच गए। कुल्लू अस्पताल के चिकित्सकों ने उपचार किया। लेकिन कुछ समय बाद दोनों की मौत हो गई। उनकी मौत से गांव शांगना शोक में डूब गया और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।