अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/मनाली/पतलीकूहल। दो दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश से लोगों और पर्यटकों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। कुल्लू शहर को जोड़ने वाली खलाड़ानाला पानी की स्कीम तीसरे दिन भी ठप रही और लोगों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ा। कई लोगों ने पानी के टैंकर मंगवा कर गुजारा किया। कुछ लोग हैंडपंप से पानी भरकर लाए।
सरवरी नाले में आई बाढ़ से पानी की स्कीम ध्वस्त हो गई हैं। वहीं शनिवार को साफ मौसम रहने के बावजूद समस्या कम नहीं हुई। नेशनल हाईवे पर 15 मील में सड़क से सटी पहाड़ी से मलबा गिरने के चलते वोल्वो मनाली नहीं गई। दिल्ली और चंडीगढ़ से वोल्वो बसों में आए सैलानियों को पतलीकूहल में ही उतरना पड़ा। हालांकि छोटे वाहन किसी तरह से मनाली आते जाते रहे। लिहाजा सैलानियों को अतिरिक्त पेसे खर्च कर पतलीकूहल से मनाली टैक्सी में जाना पड़ा। यही हालत मनाली से घर लौट रहे सैलानियों की हुई। उन्हें शाम के समय मनाली से पतलीकूहल पहुंचने के लिए टैक्सी का सहारा लेना पड़ा। दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब हरियाणा समेत अन्य राज्यों से मनाली घूमने आए सैलानी राज लुथरा, निशा, जसबीर, गुरिंदर, अतुल पनगढ़िया, स्नेहा, राजेंद्र पाल, दिप्ति, लक्की, मीनाक्षी और सचिन ने बताया कि मनाली का किराया भाड़ा देने के बाद भी उन्हें पतलीकूहल से आगे टैक्सी में जाना पड़ रहा है। बारिश और बर्फबारी से अस्त व्यस्त जनजीवन को पटरी पर लाना प्रशासन के लिए चुनौती है। मौसम विभाग ने 24 फरवरी से मौसम खराब रहने की चेतावनी दी है। वहीं जिला में अभी 50 से अधिक सड़कें, करीब 100 पेयजल स्कीमें और 100 से ज्यादा बिजली के ट्रांसफार्मर बंद चले रहे हैं। उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि लोग व सैलानी मौसम को भांपकर ही आवाजाही करें। जिला में भूस्खलन के साथ हिमस्खलन का खतरा बना हुआ है।
नेहरूकुंड में हुआ हिमस्खलन, मार्ग बंद
मनाली। मनाली के साथ नेहरूकुंड की कैंचियों में हिमखंड गिरने से सड़क अवरुद्ध है। नेहरूकुंड में गिरे हिमखंड के बाद सड़क बहाल नहीं हो सकी है। हिमखंड के साथ सड़क पर पेड़ व मलबा गिरा है। हिमखंड व मलबा गिरने से मनाली की ऊझी घाटी के कोठी, सोलंग, पलचान, कुलंग व रुआड के ग्रामीणों की बढ़ी दिक्कतें बढ़ गई है। उन्हें पैदल ही सफर करना पड़ रहा है। बर्फ का दीदार करने मनाली आ रहे सैलानी हिमखंड गिरने से सोलंगनाला का रुख नहीं कर पा रहे हैं। डीएसपी मनाली शेर सिंह ने बताया कि सैलनियों को नेहरूकुंड से पीछे बाहंग के आसपास तक ही भेजा जा रहे हैं।