24 घंटे बाद ट्रैफिक को बहाल
हुआ मनाली-लेह सामरिक मार्ग
चट्टानें खिसकने और बाढ़ के कारण बंद रहा मार्ग
सैकड़ों सैलानियों के साथ सेना के जवान सुरक्षित गंतव्यों को हुए रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सीमा सड़क संगठन की करीब 24 घंटे की जद्दोजहद के बाद मनाली-लेह सामरिक मार्ग ट्रैफिक के लिए बहाल हो गया है। घाटी समेत मनाली में बीते तीन दिनों तक हुई बारिश से जगह-जगह भूस्खलन और चट्टानें खिसकने से मनाली-लेह मार्ग बंद हो गया था। इस दौरान सेना समेत सैकड़ों पर्यटक वाहन मढ़ी से लेकर सरचू तक फंसे रहे।
बारिश के कारण चुंबक मोड़, तेलिंग नाला, पागल नाला और जिंगजिंगबार में भूस्खलन और बाढ़ के कारण मनाली लेह-मार्ग अवरुद्ध हो गया था। वीरवार रात को कोकसर, दारचा, मढ़ी और सरचू में सैलानियों को वाहनों में ही रात गुजारनी पड़ी। इस बीच सेना के कई वाहन फंसे रहे लेकिन शुक्रवार दोपहर बाद सीमा सड़क संगठन ने कड़ी मशक्कत के बाद चुंबक मोड़ के साथ ही तेलिंग और पागल नाला से मलबा हटाकर ट्रैफिक बहाल किया। वहीं जिंगजिंगबार में वीरवार रात को ही मलबा हटा दिया गया था।
सीमा सड़क संगठन के कार्यकारी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल मयंक ने बताया कि तीन दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण जगह-जगह चट्टानें और भूस्खलन होने से मनाली-लेह मार्ग 24 घंटे तक बंद रहा। संगठन ने दिन-रात कड़ी मेहनत कर मनाली-लेह मार्ग को फिर से बहाल कर दिया है। तीन दिनों के भीतर तेलिंग व पागल नाला लगभग चार बार भूस्खलन व बाढ़ के कारण बंद हुआ है।
वाहन चालक राकेश, अमरजीत, दिनेश, करतार सिंह, प्रेम लाल, दिले राम, जय राम ने बताया कि मार्ग बंद होने के कारण सैकड़ों सैलानियों और आम यात्रियों को भूखे प्यासे वाहनों के भीतर ही रात गुजारनी पड़ी है। कोकसर में सभी होटल व कैंप पैक होने के कारण ग्रामीणों में कई सैलानियों को अपने घरों में रहने की जगह दी। कोकसर पंचायत के पूर्व प्रधान रतन ने बताया कि इलाके में दूर संचार नेटवर्क ठप हो जाने से राहत कार्य में दिक्कतें पेश आई। एसडीएम केलांग अमर नेगी ने बताया कि प्रशासन ने घाटी में फंसे सैलानियों को हर संभव सहायता देने के लिए पूरा प्रयास किया गया।
सुरक्षित निकाली बसें
केलांग-किलाड़ मार्ग बंद होने के कारण निगम के 9 बसें जगह-जगह तीन दिनों तक फंसी रही। जिन्हें सड़क बहाल होने के बाद बसों को सुरक्षित निकाल दिया गया है। आरएम केलांग मंगल चंद मनेपा ने बताया कि शनिवार से निगम की तमाम रुटों पर चलने वाली बसों को नियमित तौर पर फिर से शुरू किया जा रहा है।