केलांग (लाहौल-स्पीति)। 28 जनवरी को प्रस्तावित पल्स पोलियो अभियान में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही जगजाहिर हो गई है। अब मंगलवार को रोहतांग टनल होकर विभाग ने पोलियो की वैक्सीन घाटी पहुंचाई है। पहले ही इस रास्ते से वैक्सीन घाटी पहुंचाई जा सकती थी, लेकिन विभागीय लापरवाही से यह न हो सका और सुरक्षा चक्र टूट गया।
खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य निदेशालय को नोटिस जारी किया है। चारों तरफ दबाव बनने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने आनन-फानन में पहले 11 मार्च और अब 4 फरवरी का दिन पल्स पोलियो के प्रथम चरण के लिए निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव पंकज राय ने इसकी पुष्टि की है। पहले विभाग ने तर्क दिया था कि हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होने और रोहतांग टनल से अनुमति नहीं मिलने के कारण वैक्सीन को घाटी नहीं पहुंचाया जा सका था, लेकिन मंगलवार को रोहतांग टनल होकर वैक्सीन ले जाने की अनुमति कैसे मिल गई, इसको लेकर भी विभाग कटघरे में है।
विरोधाभासी बयानों से स्पष्ट है कि पल्स पोलियो अभियान को लेकर विभाग के अधिकारी संवेदनशील नहीं रहे। उधर, एसडीएम केलांग अमर नेगी कहा कि वैक्सीन को समय पर घाटी पहुंचाया जाना चाहिए था, लेकिन शायद स्वास्थ्य विभाग और टनल प्रबंधन के बीच गलतफहमी के कारण वैक्सीन टनल के जरिए समय पर लाहौल नहीं पहुंचाई जा सकी थी। कहा कि पल्स पोलियो अभियान के लिए घाटी में मौसम माकूल है। वहीं, कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि विभाग की तरफ से हुई लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। विभाग की तरफ से इसकी उन्हें कोई जानकारी तक नहीं दी गई। सूचना होती तो विशेष चौपर के माध्यम से लाहौल तक वैक्सीन पहुंचाने का इंतजाम किया जा सकता था। मारकंडा ने कहा कि रोहतांग सुरंग अधिकारियों से बात कर मंगलवार को टनल के जरिए वैक्सीन को घाटी पहुंचाया गया है।