कुल्लू। जिला कुल्लू की सेब नर्सरियों में सेब की नई पौध का स्टाक डंप हो गया है। सूखे के चलते सेब के नर्सरी में नए पौधों की ब्रिकी में 80 फीसदी की गिरावट आई है। बागवान सूखे के कारण नई पौधे लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में नर्सरी संचालकों को नुकसान उठाना पड़ा है।
अपने बगीचों में सेब, आडू, गोल्डन, खुमानी और अनार आदि के लिए बारिश के लिए बागवान बारिश के लिए इंतजार कर रहे हैं। सूखे के कारण इस बार सेब नर्सरी में अब तक महज 20 फीसदी स्टॉक ही बिक पाया है। जबकि पिछली बार जनवरी माह के अंतिम पखवाड़े तक 50 फीसदी स्टॉक बिक चुका था। इस बार नर्सरी संचालकों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही है। बागवान नई पौध लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। कुल्लू की नर्सरियों में लगने वाले सेब की खेप को शिमला, मंडी, किन्नौर और उत्तराखंड आदि राज्यों को भेजा जाता है। बागवान शाम चंद, यशवंत सिंह और नानक चंद ने कहा कि बगीचों में सूखे के कारण वह नए पौधे नहीं लगा पा रहे हैं। नर्सरी संचालकों से सेब की नई पौध के लिए संपर्क भी किया गया है लेकिन जब तक बारिश नहीं होती है वह सेब, नाशपाती, आडू, खुमानी और पलम की नई पौध को नहीं लगा पाएंगे। सेउबाग स्थित ठाकुर नर्सरी संचालक मोती राम ठाकुर के अनुसार उन्होंने नर्सरी को तैयार करने के लिए दो साल मेहनत की है लेकिन सूखे के कारण सेब के नए पौधे खरीदने के लिए उन्हें खरीददार नहीं मिल रहे हैं। सूखे के कारण सेब पौधों की खरीद में करीब 80 फीसदी गिरावट आई है। जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। अगर ऐसी ही हालत तीन चार सप्ताह रही तो उनका स्टॉक नर्सरी में ही खराब हो जाएगा।
स्टेंडर्ड साइज सेब पौधे की कीमत 100 रुपये
नर्सरी में सेंटारोजा, मैरीपोजा, रोयल, गोल्डन, जापानी, खुमानी के सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं। सेब का स्टेंडर्ड साइज दो साल का पौधा 100 रूपये मिल रहा है। जबकि सेब का एक साल का पौधा 35 से 50 रूपये में बिक रहा है। इसके अलावा पलम के एक पौधे की कीमत 70 रूपये तक लगाई जा रही है।