कुल्लू। सेब के लिए विख्यात कुल्लू घाटी के बागवानों का रुझान अब पलम की ओर बढ़ने लगा है। घाटी के मौसम में आए बदलाव के चलते अब बागवानों के लिए सेब के बगीचों को तैयार करना मुश्किल साबित हो रहा है। सेब के पौधों में लगातार बढ़ रही बीमारियों को लेकर अब बागवान मैरीपोजा पलम को बगीचों में लगा रहे हैं।
इसे विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है। सेब का पौधा सूख जाने की सूरत में बागवान को मैरीपोजा पलम से बागवान कमाई कर सकेंगे। मैरीपोजा पलम की सब्जी मंडी में भी खूब डिमांड रहती है। यह सेंटारोजा पलम की तरह जल्दी खराब भी नहीं होता। मंडी में यह सेब से अधिक दाम में बिकता है। जबकि इसमें मेहनत भी कम करनी पड़ती है। बागवानों को मैरीपोजा पलम के लिए सेब की तरह 10-12 साल का इंतजार नहीं करना पड़ता। मैरीपोजा पलम तीन साल बाद ही सैंपल देने लगता है।
इस संबंध में बागवान डीणे राम, प्रकाश ठाकुर, मोहर सिंह, बुद्धि सिंह, जोगराज, मानचंद और सुनील शर्मा के अनुसार नर्सरी संचालकों को मैरीपोजा के पौधों के लिए ऑर्डर भी दिया गया है। अब सेब बगीचों में काफी अधिक मात्रा में मैरीपोजा पलम लगाया जा रहा है। सेब की अपेक्षा मैरीपोजा पलम का पौधा जल्दी भी सैंपल देता है। उधर, इस संबंध में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ आरके शर्मा ने कहा कि बागवान अब मैरीपोजा पलम को बगीचों में लगा रहे हैं। इसकी मार्केट वेल्यू अधिक है। वहीं पौधा भी तीन साल बाद सैंपल देने लगता है। निचले क्षेत्रों में हर साल मैरीपोजा पलम अधिक लगाया जा रहा है। जिला में पलम कुल 9669 हेक्टेयर में पलम की प्लांटेशन तैयार हो रही है। इसमें 2500 हेक्टेयर में मैरीपोजा है। जबकि अन्य में सेंटारोजा पलम है। मैरीपोजा के बेहतर दाम मिलने और इसकी फायदे अधिक होने से हर साल मैरीपोजा पलम का दायरा बढ़ता जा रहा है।