बंजार (कुल्लू)। देवता गढ़पति मूल शेषनाग जिभी 44 वर्षों बाद नए रथ पर विराजेंगे। नए रथ निर्माण कार्य छह दिसंबर से हेेगा। रथ निर्माण होने पर कुल्लवी धाम का आयोजन किया जाएगा। बंजार घाटी से आठ किलोमीटर की दूरी पर घने जंगल की औट में बसा जिभी गांव देवता गढ़पती मूल शेषनाग के गृह क्षेत्र से भी प्रसिद्घ है।
बंजार क्षेत्र में गढ़पति मूल शेषनाग का अपना एक विशेष स्थान है। जिभी के चेंऊंट में देवता की मंदिर कोठी है। करोड़ों की वनसंपदा के साथ दर्जनों बीघा जमीन है। अब देवता के नए रथ का निर्माण की प्रक्रिया को 44 वर्षों के पश्चात फिर निभाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले 21 दिसंबर 1973 में रथ का निर्माण व प्रतिष्ठा का कार्य किया गया था।
करोड़ों के मालिक शेषनाग के नए देव रथ के निर्माण को लेकर कोठी खाड़ागाढ़ और तिलोकपुर के सैकड़ों हारियानों में काफी उत्साह है। देवता के श्रीकारदार सत्यदेव नेगी, काईथ भादर सिंह, भंडारी लोभू राम, मेहता प्रताप ठाकुर, देवराज नेगी, प्रेम दास, ठाकुर पुजारी गोबिंद्र शर्मा, दरोगा प्यारे, चंद चेतराम और खूब राम का कहना है कि देवता रथ निर्माण कार्य के लिए लकड़ी बाहर से नहीं लाई जाती है। देवता परिसर चेंउट या फिर मूल शेषनाग स्थान जिभी में से ही अंगाह नामक लकड़ी का पेड़ देव आशीर्वाद से स्वयं बड़ा होता है, उसे रथ निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है। इस बार चेउट से रथ निर्माण के लिए लकड़ी लाई जाएगी व नए देवरथ का निर्माण कोठी जिभी में 21 मार्गशीर्ष तदानुसार 6 दिसंबर से आरंभ किया जा रहा है। नया देवरथ 8 दिनों में कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जाएगा। देवलूओं और हारियानों मुकेश नेगी, बबलू, भगवान सिंह, प्रेम सिंह, राजू, ललित और गीता प्रसाद शर्मा का कहना है कि देवरथ के निर्माण के लिए श्रद्धालु हजारों रुपये भेंटस्वरूप देवता को चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। देवता के कारदार सत्यदेव नेगी और पुजारी गोबिंद्र शर्मा ने बताया कि 29 मार्गशीर्ष तदानुसार 14 दिसंबर को नए देवरथ की प्रतिष्ठा की जाएगी। 14 और 15 दिसंबर को जिभी में ही कुल्लवी धाम का आयोजन किया जाएगा।