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खराहल, मणिकर्ण को मिली 12.66 करोड़ की सौगात

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नींव रखते - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने शनिवार को कुल्लू विधानसभा क्षेत्र की खराहल और मणिकर्ण घाटी में लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपये की पेयजल व सिंचाई योजनाओं के शिलान्यास किए। उन्होंने शाट में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के उपमंडल का उद्घाटन भी किया। बारी-पधरू, बालू-रा-घेरा और कशादा में जनसभाओं को भी संबोधित किया।
महेंद्र सिंह ने सबसे पहले खराहल के बारी-पधरू में 3 करोड़ 67 लाख की लागत से बनने वाली उठाऊ सिंचाई योजना खराहल के कमान क्षेत्र के विस्तार की आधारशिला रखी। इस योजना से घाटी की पांच पंचायतों के लगभग 800 किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके बाद महेंद्र सिंह ने मणिकर्ण घाटी के बालू-रा-घेरा में लगभग एक करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से बनने वाली उठाऊ पेयजल योजना का शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि इस योजना से क्षेत्र की 16 बस्तियों के चार हजार से अधिक लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना का काम एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा। गांव फागू के लिए भी एक पेयजल योजना की डीपीआर तैयार की जाएगी। मणिकर्ण के शाट में नए उपमंडल का उद्घाटन और उठाऊ सिंचाई योजना फाटी चौंग का शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि फाटी चौंग सिंचाई योजना पर एक करोड़ से अधिक की राशि खर्च होगी। महेंद्र सिंह ने कहा कि शॉट में विभाग का उपमंडल खुलने से मणिकर्ण घाटी में पेयजल, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के निर्माण को गति मिलेगी तथा इन योजनाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित होगा। आईपीएच मंत्री ने बगियांदा में 6 करोड़ 10 लाख की लागत से बनने वाली उठाऊ सिंचाई योजना जरी-बराधा का शिलान्यास भी किया।
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परंपरागत कूहलों के बजाय टपक सिंचाई योजना अपनाएं
आईपीएच मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि-बागवानी के क्षेत्र में दीर्घकालीन योजनाएं बनाने तथा समय के साथ बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों-बागवानों से परंपरागत कूहलों के बजाय टपक व फव्वारा सिंचाई योजना को अपनाने की अपील की। उन्होंने इस संबंध में इजरायल में की जा रही बागवानी तकनीकों की जानकारी भी बागवानों से साझा की। महेंद्र सिंह ने बताया कि बागवानी विकास के लिए 1688 करोड़ की परियोजना के तहत कलस्टर बनाए जाएंगे तथा इसके बेहतर कार्यान्वयन के लिए सबसे पहले सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। आसमान से बरसने वाली एक-एक बूंद का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। 1134 करोड़ की एक अन्य योजना के माध्यम से सेब उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। खुंब उत्पादन के लिए भी 423 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गई है।
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