रघुपुरगढ़ पहुंचे शृंगा ऋषि घियागी
कुल्लू। बंजार घाटी के देवता शृंगा ऋषि घियागी रविवार को सालों पुरानी परंपरा निभाने 10500 फुट ऊंचे धार्मिक एवं प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रघुपुरगढ़ रवाना हुए। दोपहर बाद देवता शृंगा ऋषि घियागी के मुख्य दो मोहरे, छत्र और अन्य निशान पूरे लाव लश्कर के साथ रघुपुरगढ़ पहुंचे जहां पहले से ही सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवता का स्वागत किया।
ढोल नगाड़ों के साथ देवता पूरे लाव लश्कर के साथ रघुपुरगढ़ पहुंचे। जहां रातभर नाच-गान का दौर चलता रहेगा। सोमवार को ज्येष्ठ संक्रांति के अवसर पर देवता यहां अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देंगे। देवता के भंडारी चेत राम वीर और कारकून निहाल भंडारी ने कहा कि सैकड़ों साल पूर्व राजाकाल के दौरान कुल्लू और मंडी के राजाओं के बीच युद्ध हुआ था। इस दौरान कुल्लू के राजा ने देवता शृंगा ऋषि घियागी को याद करते हुए अपनी जीत की कामना करते हुए इसके बदले राजा ने देवता के नाम पर रघुपुरगढ़ में हर साल ज्येष्ठ संक्रांति को जगराते का आयोजन करने मन्नत रखी। कुल्लू का राजा लड़ाई जीत गया और तब से यह परंपरा चली आ रही है। करीब 13 किलोमीटर का पैदल सफर कर रघुपुरगढ़ पहुंचे देवता से बाह्य सराज के साथ इनर सराज देवमय हो उठी। देवता परंपराओं का निर्वहन करने पर सोमवार दोपहर बाद अपने देवालय घियागी लौटेंगे।