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रोहतांग टनल से आवाजाही के लिए बढ़ सकता है इंतजार

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अमर उजाला ब्यूरो
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। निर्माणाधीन रोहतांग टनल होकर आवाजाही के लिए उत्सुक बैठे हजारों जनजातीय लोगों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम है। बीआरओ की पहली कोशिश यही है कि लोकसभा चुनाव की मतदान तिथि से पूर्व रोहतांग दर्रा को किसी भी सूरत में बहाल किया जाए। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो उस सूरत में ही मतदाताओं को रोहतांग टनल से आवाजाही की मंजूरी मिल सकती है।
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रोहतांग टनल प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर एनएम चंद्रराना ने फिलहाल रोहतांग टनल होकर आम जनता की आवाजाही की संभावना से इनकार किया है। ब्रिगेडियर का कहना है कि चुनाव आयोग ने टनल प्रबंधन से फिलहाल चुनाव सामग्री तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों को ही रोहतांग टनल से आवाजाही की सिफारिश की है। मुख्य अभियंता ने अमर उजाला को बताया कि 16 अप्रैल के बाद चुनाव आयोग, बीआरओ और टनल प्रबंधन के बीच शिमला में इस मामले को लेकर बैठक होगी। उस बैठक के बाद ही टनल से आवाजाही को लेकर कोई ठोस निर्णय निकल पाएगा। चंद्रराना ने कहा कि दो रोज पहले ही टनल के नॉर्थ पोर्टल में गिरे 80 फीट ऊंचे हिमखंड की दीवार को हटाया गया है। बताया कि नॉर्थ पोर्टल कैंप में अभी भी 10 फीट बर्फ जमी है। इससे वहां से अभी तक निर्माण कार्य को शुरू नहीं कर पाए हैं। कहा कि अभी केलांग और नॉर्थ पोर्टल आपस में जुड़ नहीं पाया है। पिछले कुछ दिनों से इस चर्चा ने जोर पकड़ा है कि मई माह के बीच से आम जनता को रोहतांग टनल होकर आवाजाही की इजाजत मिलने वाली है। इस बार लाहौल घाटी समेत रोहतांग दर्रा में दशकों बाद रिकॉर्ड बर्फबारी हुई है। लिहाजा इस साल रोहतांग दर्रा के देर से खुलने की संभावना जताई जा रही है। 115 किमी लंबी केलांग-मनाली सड़क को बहाल करने के लिए बीआरओ के जवान और मशीनें दिन-रात काम कर रहे हैं। लेकिन अभी तक केलांग से गोंदला के बीच 22 किमी और सिस्सू से गोंपाथांग 6 किमी के दायरे से बर्फ हटाई गई है। मनाली की तरफ से ब्यास नाला तक करीब 35 किमी हिस्से से बर्फ हटाई गई है। इस तरह मनाली-केलांग सड़क पर 65 किमी दायरे से बर्फ हटाई जा चुकी है। उधर, लाहौल घाटी के लिए नियमित उड़ानें भी नहीं हो पा रही है। लाहौल के कुल्लू-मनाली में अभी भी लगभग छह हजार मतदाता फंसे हुए हैं।
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