कुल्लू। जिला कुल्लू की जीवनदायिनी ब्यास नदी के तटीकरण की योजना लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकती है। वोट मांगने के लिए आने वाले उम्मीदवार को अब एक दशक से ठंडे बस्ते में पड़ी योजना पर जवाब देना होगा। लोगों को नदी के तटीकरण के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं। तटीकरण न होने से बाढ़ आने पर नदी तबाही मचा देती है, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो जाता है। पिछले साल सितंबर माह में भी बाढ़ आने से ब्यास नदी ने काफी नुकसान किया। लोगों को हर चुनाव के बाद नदी के तटीकरण योजना के सिरे चढ़ने की उम्मीद रहती है, जो बाद में उनको निराश ही करती है।
मनाली से लेकर औट तक ब्यास नदी के तटीकरण को लेकर प्रदेश की सरकारों का रवैया गैर जिम्मेदाराना रहा है। योजना को सिरे से चढ़ाने के लिए न तो कांग्रेस सरकार और न ही भाजपा ने कोई प्रयास किया है। इसके परिणामस्वरूप ब्यास नदी में बाढ़ आने पर लोगों को जानमाल के नुकसान का खतरा रहता है। बाढ़ आने पर नदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। ब्यास नदी के किनारे पलचान से लेकर औट तक हजारों की आबादी बसती है। लेकिन तटीकरण न किए जाने से यह कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में भारी बारिश होने पर इन लोगों की रात की नींद भी चली जाती है। पूरी बरसात चिंता में बीत जाती है। लोगों को लगता है कि अगर सो गए तो रात को न जाने क्या हो जाए। पिछले साल सितंबर माह में भी ब्यास नदी में आई भयंकर बाढ़ से मनाली से लेकर औट तक भारी तबाही मची थी। पतलीकूहल, अखाड़ा बाजार, लंकाबेकर, भुंतर सहित अन्य जगहों को खाली करना पड़ा था। इसके साथ ही करोड़ों की संपत्ति को ब्यास नदी अपने साथ बहाकर ले गई थी। उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर ब्यास के तटीकरण को लेकर जल्द आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे पहले भी ब्यास में वर्ष 1995 में भयंकर बाढ़ से तबाही मची थी। हालांकि सरकार के नुमाइंदों का कहना है कि केंद्र सरकार से जल संरक्षण परियोजना के तहत ब्यास के तटीकरण पर करोड़ों खर्च किए जाएंगे। लेकिन इसको लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। प्रदेश की सरकारों के रवैये को देखते हुए यही लग रहा है कि वह ब्यास के तटीकरण को लेकर गंभीर नहीं है। राजेंद्र, प्रेम लाल, दुनी चंद, प्रताप सिंह, चमन लाल तथा हीरा सिंह ने कहा कि आईपीएच विभाग की यह स्कीम एक दशक पुरानी है। हर बार चुनावों के दौरान नेता तटीकरण की बात करते हैं। लेकिन इसे पूरा करने के लिए कोई आगे नहीं आया है। इस बार लोकसभा चुुुनाव में इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
तटीकरण पर 585 करोड़ होंगे खर्च
आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण कार्यों एवं नदियों के तटीकरण के लिए 4893 करोड़ की परियोजना मंजूर की गई है। इसी परियोजना के तहत पलचान से औट तक ब्यास के तटीकरण पर 585 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
गंगा अभियान में लगाई तटीकरण की राशि
सदर विधायक सुंदर ठाकुर ने कहा कि यूपीए की सरकार ने तटीकरण की योजना पूरी कर ली थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने सारी राशि गंगा बचाओ अभियान और इसकी सफाई में लगा दी। इससे ब्यास का तटीकरण भी ठंडे बस्ते में पड़ गया है।
जल्द किया जाए तटीकरण
लोअर ढालपुर निवासी जयराम ने कहा कि ब्यास नदी का तटीकरण जल्द से जल्द होना चाहिए। फोरलेन से ब्यास नदी में डंप किया जा रहा मलबा खतरनाक साबित हो सकता है।
कई सालों से लटकी योजना
वामतट के तराकड़ा निवासी राम सिंह ठाकुर ने कहा कि ब्यास का तटीकरण सालों से लटका है। इसको लेकर सिर्फ कागजों में ही योजनाएं बनी है।
तबाही मचाती है नदी
टेक चंद ने कहा कि फोरलेन का मलबा जगह-जगह डंप किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में ब्यास तबाही मचा सकती है। ऐसे में ब्यास नदी का तटीकरण जल्द किया जाए।
नुकसान के बावजूद लापरवाही
गोपाल सिंह ठाकुर ने कहा कि पिछले वर्ष और इससे 25 साल पहले ब्यास नदी ने तबाही मचाई थी। इससे करोड़ों का नुकसान हुआ। इसके बाद भी तटीकरण में लापरवाही हो रही।