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अनछुए पर्यटन स्थलों का विकास मांगेगा हिसाब

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कुल्लू/खराहल। जिला के विधानसभा क्षेत्र कुल्लू में अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इन स्थलों को विकसित करने में सरकार गंभीरता से पहल नहीं कर रही है। सरकार महज कागजों में ही पर्यटन स्थलों को विकसित करने के दावे कर रही है। पांच साल में विस क्षेत्र में एक भी नए पर्यटन स्थल का विकास नहीं हुआ है। इस बार लोकसभा चुनाव में पर्यटन स्थल बड़ा मुद्दा बनेगा और जनता इसका प्रत्याशियों से हिसाब मांगेगी।
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प्रदेश सरकार की ओर से पर्यटन के लिए शुरू की गई नई राहें-नई मंजिलें योजना भी अभी तक ठंडे बस्ते में है। चुनावी बेला पर तो हर पार्टियां बड़े-बड़े वादे करती हैं। लेकिन बाद में भूल जाते हैं। पूर्व की कांग्रेस सरकार कुछ नहीं कर पाई थी। लेकिन वर्तमान भाजपा की सरकार ने भी अनछुए पर्यटन स्थलों का विकास नहीं किया है। अनछुए पर्यटन स्थलों की हालत देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने भी पांच साल के भीतर घाटी के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ खास नहीं किया है। कुल्लू घाटी की प्राकृतिक वादियां पर्यटकों को लुभाती है। केंद्र की एशियन बैंक की फंडिंग से 1892 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना भी कागजों के फेर में ही उलझ गई है।

ये पर्यटन स्थल नहीं हुए विकसित
कुल्लू का बिजली महादेव, मणिकर्ण घाटी की खीर गंगा, मलाणा, काईसधार और लगवैली के मनोरम स्थल आजादी के सात दशक बाद भी विकसित नहीं हुए हैं। पर्यटन का हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 फीसदी योगदान है।
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घोषणाएं कागजों तक सीमित : सुंदर
कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कुल्लू जिला में एक भी नया पर्यटन स्थल विकसित नहीं कर पाना दुखद है। सरकार की घोषणाएं महज कागजों में ही धूल फांक रही हैं। इस दिशा में भाजपा सरकार गंभीरता से ठोस नीति नहीं बना रही है।

पर्यटन स्थलों को विकसित करने के प्रयास : गोविंद
वन, परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि जिला के अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। एशियन विकास बैंक से 1892 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना के तहत सूबे में पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत नए स्थलों का भी विकास किया जाएगा।
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