पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे पर्यटक
लाहौल घाटी के युवाओं ने की ईको टूरिज्म की पहल
सैलानियों को प्रकृति से रूबरू करवाने के लिए बनाए टेंट
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। रोहतांग दर्रा में बर्फ पिघलने के बाद सैलानी अब लाहौल के बारालाचा दर्रा की तरफ रुख कर रहे हैं। मैदानी इलाकों की तपिश से बचने के लिए देश विदेश के पर्यटकों को अब बर्फ से लकदक बारालाचा की वादियां लुभाने लगी हैं। रोहतांग दर्रा में जो बर्फ बची है उस पर कार्बन की काली परत चढ़ गई है। जिस कारण बची बर्फ भी तेजी से पिघल रही है।
सैलानियों की आवभगत के लिए लाहौल घाटी में कैंप लगाए गए हैं। सैलानी होटलों की बजाय टूरिस्ट कैंपों में ठहर कर प्रकृति के साथ पारंपरिक व्यंजनों को लुत्फ उठा रहे हैं। रोहतांग टनल खुलने के बाद घाटी में पर्यटन कारोबार बढ़ने की उम्मीद से लाहौल के युवाओं ने पर्यटन कारोबार की तरफ रूख किया है। होटल निर्माण की बजाय लोग इको टूरिज्म कैंपों के निर्माण को अहमियत दे रहे हैं। रोजगार की आस लेकर युवाओं ने बैंकों से लोन लेकर इस क्षेत्र में लाखों रुपये का का निवेश किया है।
पल्लहा इको टूरिज्म कैंप के संचालक राजेंद्र राणा ने बताया कि टनल खुलने के बाद लाहौल घाटी में पर्यटन कारोबार बढ़ने की संभावना है। इसी उम्मीद के साथ घाटी के सैकड़ों पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं ने पर्यटन को रोजगार का विकल्प बनाया है। लाहौल घाटी अभी प्रदूषण से अछूता इलाका है। घाटी में पहुंचने वाले पर्यटक बारालाचा में बर्फ का आनंद लेने के साथ ही लाहौल घाटी के अनछुए पर्यटन स्थलों की सुंदरता को करीब से निहार रहे हैं।
घाटी में चंद्रा भाग संगम, त्रिलोकनाथ और मृकुला देवी मंदिर के साथ ही बोध मठ देखने लायक हैं। पर्यटन कारोबारी नवांग, दोरजे, अमरजीत, अमरनाथ, शरब ने बताया कि रोहतांग में बर्फ पिघलने के बाद सैलानी बारालाचा दर्रा का रूख कर रहे हैं। जिससे घाटी के पर्यटन कारोबार को गति मिल रही है।
कृषि मंत्री डॉ मारकंडा ने कहा कि लाहौल-स्पीति में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां की वादियां, परंपराएं, बौद्घ मठ, मंदिर, ट्रैक रूट, शुद्ध हवा और पानी सैलानियों को आकर्षित कर रहा है। लाहौल-स्पीति में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एक मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। रोहतांग टनल खुलने के बाद बारालाचा दर्रा रोहतांग का विकल्प बनेगा। जिसे विकसित करने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास करेगी।