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23 सालों से वैली ब्रिज का दंश झेल रही पर्यटन नगरी

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23 साल से बैैली ब्रिज
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का नहीं निकला समाधान
मनाली और लेफ्ट बैंक मार्ग में लगता हैं घंटों जाम
सरकार और प्रशासन हल नहीं कर पाया समस्या
मनु शर्मा
मनाली (कुल्लू)। मनाली में यातायात की समस्या का प्रमुख कारण चचोगा में लगाया गया बैली ब्रिज है। 23 वर्षों से प्रदेश की सरकारें और प्रशासन समस्या का हल नहीं निकाल पाए हैं। पुल में हर वर्ष लाखों रुपये के लकड़ी के फट्टे बदले जाते हैं। इसके बावजूद सिंगल लेन ब्रिज के चलते मनाली में और लेफ्ट बैंक में लंबा लग जाता है। जिससे लोगों को मनाली पहुंचने और मनाली से बाहर निकलने में घंटों लग जाते हैं।
बैली ब्रिज के कारण पर्यटकों व मनाली की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 1995 की भीषण बाढ़ के दौरान लेह को रसद और राशन पहुंचाने के लिए सेना के जवानों द्वारा एक सप्ताह में पुल को बनाया गया था। मनाली पर्यटन विकास मंडल के प्रधान अनूप राम ठाकुर ने कहा कि मनाली एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। हर वर्ष करोड़ों रुपये का टैक्स स्टेट और केंद्र सरकार को मिल रहा है लेकिन मनाली की किसी को कोई चिंता नहीं है। बैली ब्रिज को लेकर राजनेताओं व अधिकारियों से आश्वासनों से सिवाय कुछ नहीं मिला है।
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इस संबंध में स्थानीय निवासी सोहन ठाकुर, नरेश ठाकुर, राम कृष्ण शर्मा, पवन, रोहित शर्मा, बॉबी और अशोक के अनुसार बैली ब्रिज के चलते लोग बहुत परेशान हैं। अक्सर यहां पर जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार लोगों ने समस्या को सरकार व प्रशासन के समक्ष उठाया लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हुआ है। उन्होंने प्रदेश सरकार से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। इधर, लोनिवि के एसडीओ पीके राणा ने कहा कि बैली ब्रिज के लिए 330 मीटर जमीन पर सर्वे किया गया है। जिसमें 150 मीटर निजी, 180 मीटर वन भूमि अधिग्रहण होगा। इसकी डीपीआर भी तैयार हो गई है। वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद ऑनलाइन टेंडरिंग की जाएगी।
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