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सेब की बंपर फसल को लगा झटका, बागवान बैकफुट पर

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सेब की बंपर फसल को लगा
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झटका, बागवान बैकफुट पर
सर्दियों में अपर्याप्त बर्फ और बारिश से चिलिंग आवर्स पर असर
जिले में 55 फीसदी फसल बर्बाद होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। मौसम की बेरुखी तमाम फसलों पर भारी पड़ गई। सेब की फसल पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। इस साल सेब फसल सहित अन्य फलों की पैदावार भी कम है। बागवानों के अनुसार सेब की 55 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई। जिला में इस बार सेब की फसल बीते वर्ष से कम बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम बर्फ और बारिश से चिलिंग आर्वस पूरे न होने से फलों की सेटिंग पर असर पड़ा है। वहीं, भरपूर खिले फूलों के समय तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। जिससे पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ा है। ऐसे में बागवान बैकफुट पर आ गए हैं। बागवानों का कहना है कि फसल कम होने से साल भर का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा। जिला कुल्लू में 70 हजार लोग प्रत्यक्ष तौर पर बागवानी से जुड़े हुए हैं। जिले में अच्छी फसल होने की सूरत में करीब एक करोड़ पेटी का उत्पादन होता है।
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इस संबंध में घाटी के बागवान अमित कुमार, रोशन लाल, महेश शर्मा, देवराज नेगी, प्रताप पठानिया, वेद ठाकुर, ज्ञान ठाकुर, युवराज ठाकुर, कैलाश ठाकुर, अखिल राणा, नवीन कुमार और चमन आदि के अनुसार गत वर्ष की तुलना में इस साल 20 से 25 फीसदी फसल कम होने की आशंका है। हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब का उत्पादन थोड़ा ठीक है लेकिन लोअर और मध्यम इलाकों में सेब का उत्पादन काफी कम है।
वहीं इस संबंध में सदर फल एवं सब्जी उत्पादन संगठन के अध्यक्ष लाल चंद ठाकुर के अनुसार ओवर ऑल सेब की फसल गत वर्ष की अपेक्षा कम है। वहीं, नाशपाती की फसल भी काफी कम है।
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बागवानी अनुसंधान केंद्र सेउबाग के प्रभारी डॉ. किशोर खोसला के अनुसार इस बार मौसम की बेरुखी के चलते सेब फसल भी काफी प्रभावित हुई है। सर्दियों में कम बर्फबारी होने से यह समस्या पेश आई है। फ्लावरिंग के समय मौसम में उतार चढ़ाव भी इसका एक प्रमुख कारण है।
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