अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू की बिशलाधार पंचायत के लोगों के नलकों में सात दिन बाद पानी टपक रहा है। रोहाचला से निकाली गई पेयजल स्कीम के जवाब देने से लोगों को पांच किमी दूर ठारवी गांव के सेउनाल से पानी ढोना पड़ रहा है। वर्ष 2010-11 में विकल्प के रूप में बनी करीब एक करोड़ रुपये की खनेरनाला पेयजल स्कीम सात सालों से ही बंद पड़ी है।
सर्दी के मौसम में नदी-नालों व पेयजल स्रोतों का जल स्तर घटने से बिशलाधार पंचायत के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक साल से पंचायत के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। पंचायत के डिगेढ़, समचेढ़, मनोआ गांव के साथ सीसे स्कूल डिगेढ़, पीएचसी, वेटरनेरी व प्राइमरी स्कूल में सात दिन बाद पानी आ रहा है। पंचायतवासी विक्की, उमेश कुमार, शिव चंद, देवी सिंह, गुमत राम तथा मंगत राम ने कहा कि वर्तमान स्कीम में पानी नहीं आने से स्कूल में खिचड़ी बनाना मुश्किल हो जाता है। सर्दी में कड़ाके की ठंड में पंचायत के लोगों को पांच किमी दूर ठारवी के सेउनाल से पानी ढोना पड़ रहा है। आईपीएच विभाग ने 2010-11 में पंचायत की पेयजल समस्या को दूर करने के लिए खनेरनाला-शुश-बिशालाधार के लिए पेयजल स्कीम का निर्माण किया है। करीब एक करोड़ रुपये की योजना से गांव के लोगों को पानी की एक बूंद भी नहीं मिली है। कई जगह से योजना के पाइप ही चोरी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कीम का लाभ गांव के लोगों को नहीं मिला है। प्रदेश सरकार व आईपीएच विभाग को इसकी जांच करवानी चाहिए। शुश में बनाए गए पानी के आधा दर्जन स्टोर टैंक सात सालों से सूखे पड़े हैं।
किन्हीं कारणों से स्कीम क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसे बहाल कर दिया है। खनेरनाला-शुश स्कीम को सुचारु रूप से चलाने के लिए एस्टिमेट बनाया जा रहा है।
-प्रकाश भारद्वाज, सहायक अभियंता, आईपीएच विभाग