वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भगवान बुद्ध शृंगार
बनोगी फागली में सैकड़ों श्रद्धालुओं और हारियानों ने नवाया शीश
भगवान से सुख-समृद्धि का भी लिया आशीर्वाद
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। खराहल घाटी के गाहर गांव में बुधवार को पौ फटने से पहले देवता गिरमल और देवता पनाणू अपने देवालय स्थित गाहर से सुबह पांच बजे बनोगी फागली के लिए सैकड़ों कारकूनों के साथ बनोगी पहुंचे। सबसे पहले देवताओं ने फाड़मेह में पहुंचकर देव परंपरा से फागली में निर्वहन किया । उसके बाद देवता सैकड़ों हारियानों के साथ ढोल की थाप पर बनोगी पहुंचे। जहां पर आदि काल की आठ मूर्तियों को भंडार से देव वाद्य यंत्रों के साथ सौह में लाया गया। सौह में तमाम देवी-देवताओं का भव्य मिलन हुआ।
देवता पनाणू के पुजारी सुरेश ठाकुर ने बताया कि देवता सुबह तीन गांव और चार बेहढ़ के मुख्य कारकूनों के साथ बनोगी पहुंचे। जहां पर फागली उत्सव के लिए देव परंपरा के मुताबिक निवर्हन किया। देवता गिरमल के कारदार ठाकर चंद ने बताया कि फागली में खास तौर पर बुद्ध भगवान की मूर्ति के दर्शन साल में एक बार श्रद्धालुओं और हारियान को होते है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की मूर्ति का शृंगार ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की मंगल ध्वनि के बीच नरईटी नामक स्थान पर किया जाता है। फागली में तमाम गूरों के माध्यम से लोगों ने जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उतर पूछे। देवलु ओमदत्त, शेर सिंह, चमन, टेडी सिंह, महेंद्र, आदर्श, रितेश आदि ने कहा कि इस उत्सव काइस फाटी के दर्जनों गांव के सैकड़ों लोगों ने देवता की चाकरी देकर नतमस्तक हुए और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर परंपरागत पकवान भी मेहमानों को परोसे गए।