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जिला में बढ़ते सूखे से बागवानी व कृषि पर गहराया संकट

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सूखे से बागवानी और कृषि पर गहराया संकट
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बर्फबारी और बारिश न होने से आगामी फसल की सता रही चिंता
पीली पड़ने लगी किसानों की गेहूं, मटर और लहसुन की फसल
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। लंबे समय से बर्फबारी और बारिश न होने से सेब सहित तमाम फलदार फसलों के लिए संकट पैदा हो गया है। पर्याप्त नमी नहीं होने से बागवानी के तमाम कार्य समय पर नहीं हो रहे हैं। खाद और गोबर तथा गड्ढे बनाने का काम अटक गया है। हालांकि दिसंबर माह में बारिश और बर्फबारी तो हुई, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई।
वहीं, अब सूखे के कारण गेहूं, मटर और लहसुन के पौधे भी पीले पड़ने लगे हैं। बारिश और बर्फबारी न होने से बागवान आगामी फसल के प्रति चिंतित हैं। जिला में करीब 70 हजार लोग सीधे बागवानी से जुड़े हैं। जिले में लगभग अच्छी फसल होने पर एक करोड़ सेब पेटियों का कारोबार होता है, लेकिन इस बार समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से सेब सहित अन्य फलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने के आसार बन गए हैं।
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घाटी के बागवान अमित, राजेश, अमन कुमार, चमन, चुनी लाल, वेद ठाकुर, अशोक ठाकुर, बुद्धि प्रकाश शर्मा, नवीन, ज्ञान ठाकुर, कर्म चंद, चने राम ने कहा कि इस बार बर्फ बारी और बारिश समय पर नहीं हो रही हैै। जिसके चलते सेब और अन्य फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अगर 10-15 दिनों के अंदर बर्फ नहीं गिरती है तो पलम व आडू के पौधों में गर्मी के कारण स्पर फूटना शुरू हो जाएंगे। स्पर जल्दी फूटन से अर्ली फ्लावरिंग भी हो सकती है। इससे पैदावार कम होगी। इस संबंध में कुल्लू फ्लोत्पादक मंडल के अध्यक्ष राजगीर महंत ने कहा कि मौसम की बेरूखी सेब फसल पर भारी पड़ सकती है। दिसंबर के बाद अब जनवरी में भी बर्फबारी नहीं हो पाती है तो निश्चित तौर पर सेब उत्पादन पर असर पड़ेगा।
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